भारत एआई प्रयासों को धीमा नहीं करेगा, लोगों की जरूरतों के अनुरूप मॉडल पर जोरः सूत्र
भारत एआई प्रयासों को धीमा नहीं करेगा, लोगों की जरूरतों के अनुरूप मॉडल पर जोरः सूत्र
नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) भारत की कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में अपने प्रयासों को धीमा करने की कोई योजना नहीं है क्योंकि देश में एआई से जुड़ा अधिकांश काम लोगों की जरूरतों के अनुरूप अनुप्रयोग और मॉडल विकसित करने पर केंद्रित है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर एआई विकास को फौरी तौर पर रोकने की मांग मुख्य रूप से ‘फ्रंटियर मॉडल’ यानी एआई के सबसे उन्नत और शक्तिशाली मॉडल को लेकर उठ रही है। भारत अभी इस स्तर पर काम नहीं कर रहा है और उसका जोर देश के लोगों की जरूरतों के अनुरूप अनुप्रयोग और मॉडल विकसित करने पर है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार एआई से जुड़े सुरक्षा मुद्दों को लेकर चिंतित है। साइबर सुरक्षा खतरों और घटनाओं में एआई से जुड़ी घटनाओं की जानकारी अधिकारियों को देने की बाध्यता पहले से मौजूद है।
हाल में एआई एजेंट के अपने निर्धारित कार्यों से आगे जाकर स्वायत्त रूप से कार्रवाई करने के कुछ मामले सामने आने के बाद रिपोर्टिंग व्यवस्था को और कड़ा करने की चर्चा तेज हो गई है। इस बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने कहा कि रिपोर्टिंग के नियम, समयसीमा और उसमें दी जाने वाली जानकारी को कड़ा किया जा रहा है।
एआई को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच जब पूछा गया कि क्या भारत भी एआई विकास की गति धीमी करने पर विचार कर रहा है, तो सूत्रों ने कहा, “हम फ्रंटियर स्तर पर नहीं हैं, इसलिए अपने किसी भी शोध को रोकने का कोई कारण नहीं है। मुद्दा फ्रंटियर मॉडल विकसित करने से जुड़ा है।”
सूत्रों ने कहा कि भारत का शुरू से ही उद्देश्य जरूरी नहीं कि फ्रंटियर मॉडल विकसित करना रहा हो, बल्कि ऐसे अनुप्रयोग और मॉडल विकसित करना रहा है जो देश के लोगों की जरूरतों के अनुरूप काम कर सकें।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि एआई के साथ लाभ के अलावा कई जोखिम जुड़े हैं और उपयोगकर्ता सुरक्षा के लिए नियमन की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा था कि सरकार एआई को सुरक्षित रखने और ऑनलाइन सुरक्षा के लिए उद्योग के साथ मिलकर काम कर रही है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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