भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए दो दशकों में 2,000 गीगावाट क्षमता जोड़ने की जरूरत: सागर अदाणी

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए दो दशकों में 2,000 गीगावाट क्षमता जोड़ने की जरूरत: सागर अदाणी

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए दो दशकों में 2,000 गीगावाट क्षमता जोड़ने की जरूरत: सागर अदाणी
Modified Date: June 27, 2026 / 06:00 pm IST
Published Date: June 27, 2026 6:00 pm IST

लंदन, 27 जून (भाषा) अदाणी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा कि बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को अगले दो दशकों में लगभग 2,000 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने की आवश्यकता होगी।

लंदन में आयोजित पहले अदाणी ग्रीन इलेक्ट्रिफिकेशन डायलॉग में उन्होंने कहा कि भारत के सामने तेजी से बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ ऊर्जा को सस्ती, सुलभ और स्वच्छ बनाए रखने की दोहरी चुनौती है।

उन्होंने कहा,’हम एक बड़े संरचनात्मक बदलाव की बात कर रहे हैं, जिसके तहत अगले दो दशकों में लगभग 2,000 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी जानी है। यह सब करते हुए यह भी सुनिश्चित करना है कि यह ऊर्जा सस्ती, सुलभ और लगातार स्वच्छ बनी रहे। यही इस अवसर का पैमाना है और यही भारत की सबसे बड़ी चुनौती भी है।’

सागर अदाणी ने बताया कि भारत ने 2024 में सभी ईंधन स्रोतों को मिलाकर लगभग 10,000 टेरावॉट-आर ऊर्जा की खपत की, जबकि इसकी तुलना में चीन में यह खपत 32,810 टेरावॉट-आर थी। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि जैसे-जैसे लोगों की आय और बिजली की खपत बढ़ेगी, भारत की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताएं कितनी व्यापक होंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत के लिए भविष्य का रास्ता स्पष्ट है। हमें हर क्षेत्र का विद्युतीकरण करना होगा और आयातित ऊर्जा पर संरचनात्मक निर्भरता कम करनी होगी। हमें देश में उपलब्ध संसाधनों पर आधारित ऊर्जा ढांचा विकसित करना होगा।’’

सागर अदाणी ने कहा कि भारत को ऊर्जा बदलाव के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत, दक्ष तापीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा का उपयोग करना होगा।

उन्होंने कहा कि मजबूत आधारभूत बिजली के बिना ऊर्जा प्रणाली का संतुलन संभव नहीं है।

उन्होंने सरकार द्वारा पिछले एक दशक में किए गए सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि इससे निवेश वातावरण, बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और पारेषण क्षेत्र में सुधार हुआ है।

अदाणी समूह की भूमिका का जिक्र करते हुए अदाणी ने कहा कि यह समूह बिजली मूल्य श्रृंखला के सभी क्षेत्रों में कार्यरत है।

उन्होंने बताया कि समूह का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जबकि वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट का परमाणु ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित करने की योजना है।

अदाणी ने यह भी कहा कि समूह ऊर्जा भंडारण, पारेषण अवसंरचना और हरित हाइड्रोजन में भी निवेश कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसे वास्तविकता में बदलने के लिए हमारे चेयरमैन गौतम अदाणी ने ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में 100 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है, जो दुनिया में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े संकल्पों में से एक है। यह कोई अलग-थलग निवेश नहीं बल्कि एक एकीकृत रणनीति है।’

अदाणी ने कहा कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन का यह विशाल पैमाना सरकारों, उद्योग जगत और वित्तीय संस्थानों के बीच सहयोग की मांग करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत के सामने मौजूद ऊर्जा चुनौती और अवसर किसी एक कारोबारी समूह द्वारा अकेले पूरा किए जाने से कहीं बड़े हैं। इसके लिए भारत और विकासशील दुनिया में सामूहिक प्रयास, निरंतर नीतिगत नवाचार और अरबों डॉलर के वित्तपोषण की आवश्यकता होगी, ताकि ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की किफायती उपलब्धता और ऊर्जा सततता सुनिश्चित की जा सके।’’

सागर अदाणी ने यह बात लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान साइंस म्यूजियम, लंदन में आयोजित प्रथम अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में कही।

इस कार्यक्रम का आयोजन अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन के सहयोग से किया था।

इस संवाद में नीति-निर्माता, निवेशक, उद्योग जगत के दिग्गज और जलवायु विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्होंने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने के लिए आवश्यक नीतियों, निवेश और बुनियादी ढांचे पर विचार-विमर्श किया।

सागर अदाणी ने कहा, “ऊर्जा सुरक्षा, किफायती दरों पर उपलब्धता और सततता हमारे समय की सबसे प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।”

उन्होंने कहा, “विद्युतीकरण इन तीनों चुनौतियों से निपटने के सबसे प्रभावी रास्तों में से एक के रूप में उभर रहा है। जो देश मजबूत और टिकाऊ वृद्धि तथा अधिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता चाहते हैं, उनके लिए विद्युतिकरण को तेज करना अब एक विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुका है।”

भाषा

योगेश रमण

रमण


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