भारत के वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर बढ़ रहा है विदेशी प्रभाव: जीटीआरआई
भारत के वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर बढ़ रहा है विदेशी प्रभाव: जीटीआरआई
नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) शोध संस्थान जीटीआरआई ने मंगलवार को कहा कि प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा का क्रेड में 90 करोड़ डॉलर का निवेश भारत के वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) क्षेत्र और वित्तीय आंकड़ा परिवेश पर बढ़ते विदेशी असर को लेकर चिंता पैदा करता है।
इस सौदे से मेटा को देश में उपभोक्ता के वित्तीय व्यवहार के आंकड़ों के सबसे बड़े भंडार में से एक तक पहुंच मिल गयी है। इन आंकड़ों में क्रेडिट कार्ड, कर्ज, निवेश, बीमा और यूपीआई (एकीकृत पेमेंट इंटरफेस) लेनदेन शामिल हैं।
जीटीआरआई ने कहा कि फोनपे, गूगलपे और व्हाट्सएप-पे पहले से ही क्रमशः वॉलमार्ट, गूगल और मेटा से जुड़े हुए हैं।
दूसरी ओर, चीन ने अलीपे और वीचैटपे जैसी घरेलू कंपनियों के जरिये अपना डिजिटल भुगतान परिवेश बनाया, जिसमें मालिकाना हक और रणनीतिक नियंत्रण चीनी कंपनियों के पास ही हैं।
हालांकि, जीटीआरआई ने कहा कि भारत ने विदेशी कंपनियों को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर मजबूत स्थिति बनाने रखने की अनुमति दी है, जिससे बहुमूल्य वित्तीय आंकड़ों का मालिकाना हक विदेशी नियंत्रण वाले परिवेश में जाने का जोखिम है।
उल्लेखनीय है कि वित्तीय प्रौद्योगिकी मंच क्रेड ने सोमवार को कहा कि वह मेटा की अगुवाई में वित्त पोषण के जरिये 8,550 करोड़ रुपये (लगभग 90 करोड़ डॉलर) जुटाएगी। इस बड़े सौदे के तहत, कंपनी के संस्थापक कुणाल शाह सीईओ का पद छोड़ देंगे और वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा के मैसेजिंग मंच व्हाट्सएप की कमान संभालेंगे।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘मुख्य मुद्दा यह नहीं है कि मेटा को आज क्रेड के पास उपलब्ध आंकड़ों तक पहुंच मिलती है या नहीं। मुद्दा यह है कि क्या भारत धीरे-धीरे लाखों आर्थिक रूप से सक्रिय नागरिकों के वित्तीय आंकड़ों पर नियंत्रण को विदेशी मालिकाना हक वाले डिजिटल परिवेश में जाने दे रहा है। मेटा-क्रेड सौदे को आखिरकार वित्त पोषण दौर के तौर पर कम और उस बदलाव में एक अहम पड़ाव के तौर पर अधिक याद किया जा सकता है।’’
उन्होंने कहा कि 2018 में शुरू हुई क्रेड के पास भारत में उपभोक्ता के वित्तीय व्यवहार से जुड़े आंकड़ों का सबसे बड़ा भंडार है और इसके लगभग 1.7 करोड़ उपयोगकर्ता क्रेडिट कार्ड, भुगतान रिकॉर्ड, खर्च करने के तरीके, बिल भुगतान, कर्ज,निवेश, बीमा की खरीद और तेजी से बढ़ते यूपीआई लेन-देन के बारे में जानकारी देते हैं।
श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘कंपनी भारत के क्रेडिट-कार्ड बिल पेमेंट का 40 प्रतिशत से अधिक प्रसंस्कृत करती है। इससे उसे अमीर भारतीयों की वित्तीय जिंदगी की बहुत विस्तृत जानकारी मिलती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि क्रेड आज मेटा को ग्राहक आंकड़ों तक पहुंच न दे, लेकिन जीटीआरआई का अनुमान है कि यह सारे आंकड़े जल्द ही सीधे या परोक्ष रूप से मेटा के उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे, जिसका इस्तेमाल वह एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने या उन्हें बेचने के लिए कर सकती है।’’
श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘क्रेड में मेटा के 90 करोड़ डॉलर के निवेश से भारत के फिनटेक क्षेत्र और वित्तीय आंकड़ों के परिवेश पर बढ़ते विदेशी प्रभाव को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं।’’
भाषा रमण अजय
अजय

Facebook


