भारत में नियुक्तियों की धारणा अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत : रिपोर्ट

भारत में नियुक्तियों की धारणा अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत : रिपोर्ट

भारत में नियुक्तियों की धारणा अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत : रिपोर्ट
Modified Date: September 8, 2026 / 05:07 pm IST
Published Date: September 8, 2026 5:07 pm IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) भारत में नियुक्तियों को लेकर धारणा इस साल अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में दुनिया में सबसे मजबूत है और बड़ी संख्या में नियोक्ता इस दौरान कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। एक रिपोर्ट में मंगलवार को यह कहा गया।

मैनपावरग्रुप के नवीनतम रोजगार परिदृश्य सर्वेक्षण के अनुसार, इस साल की अंतिम तिमाही में भारत में रोजगार परिदृश्य मजबूत हुआ है। इसकी मुख्य वजह कंपनियों का विस्तार है जबकि कर्मचारियों की संख्या घटाने की संभावित वजहों में स्वचालन, प्रौद्योगिकी और आर्थिक चुनौतियां प्रमुख हैं।

भारत में एक से 31 जुलाई के बीच 3,055 नियोक्ताओं के बीच किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए भारत का शुद्ध रोजगार परिदृश्य (एनईओ) 54 प्रतिशत रहा।

शुद्ध रोजगार परिदृश्य (एनईओ) की गणना उन नियोक्ताओं के प्रतिशत में से भर्ती गतिविधि बढ़ाने की उम्मीद रखने वाले नियोक्ताओं का प्रतिशत घटाकर की जाती है, जो भर्ती गतिविधि में कमी की उम्मीद कर रहे हैं।

भारत में करीब 65 प्रतिशत नियोक्ता अक्टूबर से दिसंबर के बीच कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जबकि 11 प्रतिशत इसमें कमी की उम्मीद कर रहे हैं। सर्वेक्षण में शामिल 24 प्रतिशत नियोक्ताओं का मानना है कि कर्मचारियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा।

मैनपावरग्रुप के भारत एवं पश्चिम एशिया के प्रबंध निदेशक संदीप गुलाटी ने कहा, ‘‘2026 की चौथी तिमाही की ओर बढ़ते हुए भारत में नियोक्ताओं का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। शुद्ध रोजगार परिदृश्य छह अंक बढ़कर 54 प्रतिशत हो गया है, जो पिछली तिमाही से छह अंक और पिछले साल इसी समय से 11 अंक अधिक है।’’

वैश्विक स्तर पर रोजगार परिदृश्य के मामले में भारत सबसे आगे है और उसका स्तर वैश्विक औसत से 25 अंक अधिक है।

सूची में शामिल अन्य देशों में ब्राजील (53 प्रतिशत), पनामा (49 प्रतिशत), मेक्सिको (41 प्रतिशत), संयुक्त अरब अमीरात (41 प्रतिशत) और पेरू (40 प्रतिशत) हैं।

भारत में करीब 70 प्रतिशत नियोक्ता बदलती भूमिकाओं और कौशल की बदलती मांग के अनुरूप नियुक्तियां कर रहे हैं। वैश्विक क्षमता केंद्रों के लगातार विस्तार के साथ वित्त एवं बीमा तथा आतिथ्य जैसे क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि से प्रतिभाओं की लगातार मांग बनी हुई है।

गुलाटी ने कहा, ‘‘नियोक्ता कृत्रिम मेधा (एआई) के कारण कार्यबल में बदलाव, कौशल की कमी और उम्मीदवारों की अपेक्षाओं में असंगति जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर रोजगार परिदृश्य भरोसेमंद और उद्देश्यपूर्ण वृद्धि का बना हुआ है।’’

पिछली तिमाही और सालाना आधार पर तुलना करने पर भारत के सभी चार क्षेत्रों में नियुक्तियों की मंशा मजबूत हुई है। भारत में पूर्वी क्षेत्र सबसे प्रतिस्पर्धी रहा, जहां शुद्ध रोजगार परिदृश्य 59 रहा।

सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया में एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है और नियोक्ताओं को नियुक्ति पूरी करने में लगने वाले समय में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है।

गुलाटी ने कहा, ‘‘भर्ती प्रक्रिया भी तेज हो रही है। 57 प्रतिशत नियोक्ताओं ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल भर्तियां पूरी करने में कम समय लग रहा है। इसका मुख्य कारण भर्ती प्रक्रिया में कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अब असली चुनौती सही कौशल वाले लोगों की उपलब्धता है। नौकरी की जरूरतें लगातार बदल रही हैं और सही क्षमता वाले उम्मीदवारों को तलाशना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में इस गति को बनाए रखने के लिए कर्मचारियों के कौशल को उन्नत करने और लगातार सीखने में निवेश करना महत्वपूर्ण है।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय


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