मोटर वाहन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भारत के समर्थन उपाय डब्ल्यूटीओ मानकों के अनुरूप: अधिकारी

मोटर वाहन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भारत के समर्थन उपाय डब्ल्यूटीओ मानकों के अनुरूप: अधिकारी

मोटर वाहन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भारत के समर्थन उपाय डब्ल्यूटीओ मानकों के अनुरूप: अधिकारी
Modified Date: February 25, 2026 / 11:36 am IST
Published Date: February 25, 2026 11:36 am IST

नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) मोटर वाहन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए भारत के समर्थन उपाय पूरी तरह से विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मानकों के अनुरूप हैं और देश डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान समिति के समक्ष कार्यवाही में इनका दृढ़ता से बचाव करेगा। एक अधिकारी ने यह बात कही।

चीन के अनुरोध के बाद डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान निकाय ने इस मामले की सुनवाई के लिए एक समिति गठित करने की मंगलवार को घोषणा की थी।

अधिकारी ने कहा कि भारत को खेद है कि चीन ने इस मामले पर सद्भावना के साथ हुई व्यापक द्विपक्षीय परामर्श प्रक्रिया के बावजूद समिति गठन की दिशा में कदम बढ़ाया, जबकि इन परामर्शों के दौरान भारत ने संबंधित उपायों पर विस्तृत स्पष्टीकरण एवं जानकारी दी थी।

अधिकारी ने कहा, ‘‘ भारत का मानना है कि समिति गठन के लिए चीन का अनुरोध इन उपायों की संरचना एवं क्रियान्वयन दोनों की गलत समझ को दर्शाता है। भारत इस बात पर कायम है कि चीन ने जिन उपायों को चुनौती दी है वे पूरी तरह जनरल एग्रीमेंट ऑन टैरिफ्स एंड ट्रेड, 1994 और सब्सिडी एवं प्रतिकारक उपायों पर समझौता सहित सहित डब्ल्यूटीओ समझौतों तथा भारत के अधिकारों व दायित्वों के अनुरूप हैं।’’

अधिकारी ने कहा कि देश समिति की कार्यवाही में भाग लेगा और अपने उपायों का ‘‘जोरदार’’ बचाव करेगा। उसे विश्वास है कि समिति इन उपायों को डब्ल्यूटीओ नियमों के अनुरूप पाएगी।

अक्टूबर 2025 में डब्ल्यूटीओ में दायर शिकायत में चीन ने आरोप लगाया था कि उन्नत रसायन सेल बैटरियों, मोटर वाहन और इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की नीति के तहत भारत की उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना में कुछ शर्तें वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन करती हैं, क्योंकि वे चीनी वस्तुओं एवं निर्यातकों के साथ भेदभाव हैं। चीन इन उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक है।

डब्ल्यूटीओ नियमों के अनुसार, परामर्श की मांग विवाद निपटान प्रक्रिया का पहला चरण होता है। यदि शिकायतकर्ता द्वारा मांगे गए परामर्श से संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो वह मुद्दे पर निर्णय देने के लिए डब्ल्यूटीओ से समिति गठित करने का अनुरोध कर सकता है।

भारत और चीन दोनों विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य हैं। यदि किसी सदस्य देश को लगता है कि किसी अन्य सदस्य देश की किसी नीति या योजना के तहत दिया गया समर्थन उपाय उसके कुछ वस्तुओं के निर्यात को नुकसान पहुंचा रहा है, तो वह डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र के तहत शिकायत दर्ज कर सकता है।

चीन, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में चीन को भारत का निर्यात 14.5 प्रतिशत घटकर 14.25 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया था जो 2023-24 में 16.66 अरब अमेरिकी डॉलर था। हालांकि, 2024-25 में आयात 11.52 प्रतिशत बढ़कर 113.45 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जो 2023-24 में 101.73 अरब अमेरिकी डॉलर था।

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 99.2 अरब अमेरिकी डॉलर था।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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