विवाद निपटान के लिए जीएसटी की तर्ज पर औद्योगिक भूमि परिषद स्थापित हो: सीआईआई

विवाद निपटान के लिए जीएसटी की तर्ज पर औद्योगिक भूमि परिषद स्थापित हो: सीआईआई

विवाद निपटान के लिए जीएसटी की तर्ज पर औद्योगिक भूमि परिषद स्थापित हो: सीआईआई
Modified Date: April 19, 2026 / 03:26 pm IST
Published Date: April 19, 2026 3:26 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने राष्ट्रीय मानक तय करने, राज्यों में भूमि संबंधी नियमों में सामंजस्य बिठाने, कार्यान्वयन की निगरानी करने और विवाद समाधान निकाय के रूप में काम करने के लिए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) ढांचे की तर्ज पर राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि परिषद (एनआईएलसी) की स्थापना का प्रस्ताव दिया है।

यह सिफारिश ‘सीआईआई भूमि मिशन: भारत में औद्योगिक भूमि प्रबंधन में सुधार का ढांचा’ नामक रिपोर्ट का हिस्सा है। यह रिपोर्ट टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक और सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष टी वी नरेंद्रन की अगुवाई में तैयार की गई है।

रिपोर्ट भारत के औद्योगिक भूमि परिवेश में संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने का खाका तैयार करती है। रिपोर्ट की एक प्रमुख सिफारिश एकीकृत, जीआईएस-सक्षम राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक बनाना है, जो भूमि की उपलब्धता, क्षेत्रवार स्थिति, उपयोगिताओं, पर्यावरणीय बाधाओं और स्पष्ट मालिकाना हक पर ताजा जानकारी प्रदान करेगा।

सीआईआई ने स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क में राज्यों के बीच बड़े अंतर की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। उद्योग मंडल के अनुसार, इससे परियोजना की लागत काफी बढ़ जाती है और निवेश के फैसले प्रभावित होते हैं। इसलिए, रिपोर्ट में औद्योगिक भूमि के लिए एक समान राष्ट्रीय स्तर पर निर्देशित स्टाम्प शुल्क अपनाने की सिफारिश की गई है।

सीआईआई ने कहा कि विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और लॉजिस्टिक के लिए औद्योगिक भूमि एक मूल आधार है। हालांकि, राज्यों में इस समय हालात नियामकीय जटिलताओं, अस्पष्ट भूमि स्वामित्व और आवंटित भूखंडों के कम उपयोग जैसी चुनौतियों से भरे है।

नरेंद्रन ने कहा, ”औद्योगिक भूमि में चुनौती केवल अधिग्रहण की नहीं, बल्कि उसकी तैयारी और उपयोग की भी है। आवंटन के बाद भी कब्जे के मुद्दों और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण परियोजनाएं अटक जाती हैं।”

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारत की विनिर्माण महत्वाकांक्षाएं तब तक पूरी नहीं हो सकतीं, जब तक कि औद्योगिक भूमि निवेश के लिए तैयार न हो जाए और व्यवस्था पारदर्शी न हो जाए।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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