आईएससी ने डब्ल्यूएचओ के खाद्य उत्पादों पर पोषण आधारित कराधान के सुझाव को लेकर विंता जताई

आईएससी ने डब्ल्यूएचओ के खाद्य उत्पादों पर पोषण आधारित कराधान के सुझाव को लेकर विंता जताई

आईएससी ने डब्ल्यूएचओ के खाद्य उत्पादों पर पोषण आधारित कराधान के सुझाव को लेकर विंता जताई
Modified Date: September 19, 2023 / 06:50 pm IST
Published Date: September 19, 2023 6:50 pm IST

नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) इंडियन सेलर्स कलेक्टिव (आईएससी) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक हालिया रिपोर्ट पर चिंता जताई है। इस रिपोर्ट में पोषण संबंधी सामग्री के आधार पर कराधान प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया गया है।

डब्ल्यूएचओ की ‘भारत में अति प्रसंस्कृत (अल्ट्रा-प्रोसेस्ड) खाद्य पदार्थों की वृद्धि : रुझानों का विश्लेषण’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में बिना पैकेट और बिना लेबल वाले खाद्य पदार्थों पर कर बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। इस तरह के उत्पादों पर अभी माल और सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत पांच प्रतिशत कर लगाया जाता है।

इंडियन सेलर्स कलेक्टिव के बयान में कहा गया है कि इसमें ‘पॉइंट-ऑफ-सेल मार्केटिंग’ प्रतिबंधों को लागू करने, छोटे किराना विक्रेताओं या किराना स्टोरों द्वारा दी जाने वाली मुफ्त वस्तुओं और छूट पर अंकुश लगाने और असंगठित खाद्य विनिर्माण क्षेत्र पर कार्रवाई की भी वकालत की गई है।

इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शून्य-चीनी कार्बोनेटेड पेय को कार्बोनेटेड पेय के समान जीएसटी श्रेणी के तहत वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए, जिसपर मौजूदा समय में उच्चतम 40 प्रतिशत कर लगाया जाता है।

रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए इंडियन सेलर्स कलेक्टिव ने कहा कि यह ‘‘भारतीय व्यंजन और विरासत पर हमला’’ है और कृत्रिम और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देता है।

एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि यह ‘‘वैश्विक कोला और खाद्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से एक प्रॉक्सी रिपोर्ट’’ थी, जो भारतीय पारंपरिक भोजन को कमजोर करने और लोकप्रिय विदेशी खाद्य पदार्थों द्वारा भारतीय खाद्य बाजार पर कब्जा करने के अपने एजेंडा को आगे बढ़ा रहे हैं।

इंडियन सेलर्स कलेक्टिव के सदस्य और राष्ट्रीय समन्वयक अभय राज मिश्रा ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट भारतीय खाद्य पदार्थों की पीढ़ियों पुरानी संरचना की उपेक्षा करती है और अप्रयुक्त वैज्ञानिक दावों के आधार पर कृत्रिम रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने का आह्वान करती है।

इंडियन सेलर्स कलेक्टिव देशभर के प्रमुख व्यापार संघों और भारतीय विक्रेताओं के प्रतिनिधि निकायों का एक प्रमुख निकाय है। यह उन छोटे विक्रेताओं की मदद करता है जिन्हें अनुचित व्यापार व्यवहार और बाज़ार के खिलाफ शिकायत है।

जुलाई 2023 में, इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी), विश्व स्वास्थ्य संगठन और ‘फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन’ (एफएओ) ‘जॉइंट एक्सपर्ट कमेटी ऑन फूड एडिटिव्स’ (जेईसीएफए) ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें बताया गया था कि दुनिया के सबसे आम ‘कृत्रिम मिठास’ में से एक, एस्पार्टेम संभवतः मनुष्यों के लिए कैंसरकारी है।

एस्पार्टेम का उपयोग प्रमुख शीतल पेय निर्माताओं द्वारा कोला की कम-चीनी किस्मों के उत्पादन में किया जाता है।

मई, 2023 में डब्ल्यूएचओ ने गैर-चीनी मिठास (एनएसएस) पर नए दिशानिर्देश पेश किए थे। ये दिशानिर्देश वजन नियंत्रण या गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के जोखिम को कम करने के लिए एनएसएस के उपयोग के खिलाफ सलाह देते हैं।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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