Twisha Sharma Death Case: गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका मामले में सुनवाई, इतने घंटे तक चली बहस, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

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Twisha Sharma Death Case: गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका मामले में सुनवाई, इतने घंटे तक चली बहस, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
Modified Date: May 27, 2026 / 08:13 pm IST
Published Date: May 27, 2026 8:11 pm IST

जबलपुर। Twisha Sharma Death Case: भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा डेथ केस में आरोपी गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लंबी और अहम सुनवाई हुई। करीब 2 घंटे 45 मिनट तक चली मैराथन बहस के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि “धैर्य रखें, हम आज ही फैसला सुनाएंगे।” मामले में राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पक्ष रखा, जबकि गिरिबाला सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता रामाकृष्णन ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान अदालत में दोनों पक्षों के बीच कानूनी और तथ्यात्मक आधारों पर तीखी बहस देखने को मिली।

जानिए सरकार का पक्ष

Twisha Sharma Death Case: राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि गिरिबाला सिंह ने जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि जिला अदालत ने जल्दबाजी में अग्रिम जमानत दे दी। उन्होंने अदालत को बताया कि जांच एजेंसी द्वारा कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन गिरिबाला सिंह ने न तो नोटिसों का जवाब दिया और न ही जांच में सहयोग किया। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका त्विषा शर्मा को बदनाम करने की कोशिश की। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि त्विषा द्वारा भेजे गए कुछ मैसेज में सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ भी बातें कही गई थीं। उन्होंने अदालत में एक कथित संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि त्विषा ने अपनी मां को “अम्मा ने आग लगा दी” लिखकर मैसेज भेजा था। सरकार ने अदालत से गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि आरोपी का रवैया जांच को प्रभावित करने वाला रहा है।

बचाव पक्ष का दावा: हर जांच में सहयोग किया

वहीं गिरिबाला सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामाकृष्णन ने सरकार के सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि गिरिबाला सिंह ने हर तरह की जांच में सहयोग किया है और उनके खिलाफ लगाए गए दहेज प्रताड़ना के आरोप पूरी तरह झूठे हैं। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि व्हाट्सएप चैट में ऐसा कोई संदेश नहीं है जिससे यह साबित हो कि गिरिबाला सिंह ने त्विषा को प्रताड़ित किया था। ना तो किसी मानसिक प्रताड़ना का जिक्र है और ना ही दहेज मांगने का। वकील ने यह भी कहा कि 2 लाख रुपये दहेज मांगने का आरोप निराधार है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में 7 लाख रुपये के मनी ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। वकील ने दावा किया कि शादी के बाद गिरिबाला सिंह और समर्थ ने त्विषा को 7 लाख रुपये दिए थे। साथ ही यह भी कहा गया कि त्विषा और उनकी सास गिरिबाला सिंह के बीच संबंध मधुर थे। बचाव पक्ष ने अदालत में यह तर्क भी रखा कि मौत से दो दिन पहले त्विषा ने मदर्स डे पर अपनी सास को ग्रीटिंग कार्ड दिया था। रामाकृष्णन ने अदालत में व्हाट्सएप चैट का हवाला देते हुए कहा कि त्विषा ने खुद लिखा था- “अम्मा मेरे साथ ठीक हैं।”

कानूनी प्रावधानों पर भी हुई बहस

गिरिबाला सिंह के वकीलों ने हाईकोर्ट में कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि जिस अदालत से अग्रिम जमानत मिली है, चुनौती भी उसी अदालत में दी जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को सीधे हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। वहीं त्विषा शर्मा के पिता की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि गिरिबाला सिंह को केवल तीन सामान्य आधारों पर अग्रिम जमानत दे दी गई। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे आधारों को पर्याप्त माना जाए तो 90 प्रतिशत आरोपियों को अग्रिम जमानत मिलनी चाहिए। बचाव पक्ष ने अदालत में यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वे न्यायिक क्षेत्र के उच्च पदों पर रह चुकी हैं और भोपाल की निवासी हैं, इसलिए उनके फरार होने की संभावना नहीं है।

HC समय समाप्त होने के बाद भी चलती रही सुनवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट में निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी सुनवाई जारी रही। अदालत ने समय पूरा होने के करीब 45 मिनट बाद तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इस दौरान अदालत कक्ष में पूरे मामले को लेकर गहन बहस और कानूनी तर्कों का दौर चलता रहा। फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की नजर अदालत के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।

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