शांत रहें व नौकरी बचाने के लिए एआई उपकरणों का इस्तेमाल सीखें: प्रौद्योगिकी जगत के दिग्गज

शांत रहें व नौकरी बचाने के लिए एआई उपकरणों का इस्तेमाल सीखें: प्रौद्योगिकी जगत के दिग्गज

शांत रहें व नौकरी बचाने के लिए एआई उपकरणों का इस्तेमाल सीखें: प्रौद्योगिकी जगत के दिग्गज
Modified Date: February 16, 2026 / 12:13 pm IST
Published Date: February 16, 2026 12:13 pm IST

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) से नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच प्रौद्योगिकी जगत के दिग्गजों ने कर्मचारियों को साफ संदेश दिया है कि ‘‘शांत रहें और अपने कौशल को लगातार बढ़ाएं।’’

उन्होंने कहा कि एआई की लहर के साथ बने रहने के लिए ताउम्र सीखते रहने की क्षमता जरूरी है और अगले तीन से पांच वर्ष में एआई के और विकसित होने के साथ कार्यबल में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

‘एआई के दौर में रोजगार का भविष्य’ विषय पर आयोजित सत्र में उद्योग जगत के लोगों ने माना कि कुछ मौजूदा नौकरियां अप्रासंगिक हो सकती हैं, लेकिन कृत्रिम मेधा नई रोजगार संभावनाएं भी उत्पन्न करेगी और कर्मचारियों को यह पहचानना होगा कि वे किन कौशलों को निखार सकते है।

‘इन्फो एज’ (जिसके अंतर्गत नौकरी डॉट कॉम आता है) के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने बैंकों में कंप्यूटर आने के समय का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘ तब किसी की नौकरी नहीं गई, बल्कि उत्पादकता बढ़ गई।’’

एआई अपनाने से नौकरियां जाने के सवाल पर बिखचंदानी ने युवाओं से कहा, ‘‘ नीति की चिंता मत करें। यह सोचें कि आप ऐसा क्या करें ताकि एआई, आपकी नौकरी न छीने बल्कि आपको नौकरी दिलाने में मदद करे।’’

उन्होंने युवाओं को उपयोगी एआई उपकरण सीखने की सलाह दी।

उन्होंने कहा, ‘‘ एआई आ चुका है और यह रुकने वाला नहीं है। अगर आप एआई का इस्तेमाल नहीं करेंगे, तो आपके लिए एआई का रास्ता बंद हो जाएगा। अगले तीन महीनों में कम से कम तीन एआई मंचों का इस्तेमाल सीखने का लक्ष्य तय रखें। जितना ज्यादा आप सीखेंगे, आपकी नौकरी उतनी ही सुरक्षित रहेगी।’’

प्रौद्योगिकी उद्योग के दिग्गजों ने पेशेवरों को एआई उपकरणों को अपनाने और उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुरूप खुद को ढालने की सलाह दी, ताकि बदलते रोजगार बाजार में प्रासंगिक बने रह सकें।

इन्फोसिस की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई ‘एजवर्व’ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश सीतारमैया ने कहा कि एआई, क्षमता को तेजी से बढ़ाने वाला माध्यम बनेगा और ‘‘ताउम्र सीखने की क्षमता’’ ही एआई की लहर से निपटने का मूल मंत्र है।

उन्होंने कहा कि एआई से कारोबार की उत्पादकता बढ़ी है लेकिन अंततः काम की जिम्मेदारी लेने के लिए इंसान जरूरी रहेगा। ‘‘ इसलिए नौकरियां कहीं नहीं जा रहीं, बल्कि नौकरियों की प्रकृति बदल रही है।’’

संपर्क के संस्थापक विनीत नायर ने कहा कि एआई के कारण मौजूदा लगभग 50 प्रतिशत नौकरियां खत्म होंगी, लेकिन उतनी ही नई नौकरियां उत्पन्न भी होंगी, जिनके लिए कुशल मानव संसाधन की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ एआई हमें खुद को फिर से प्रशिक्षित करने का अवसर देता है लेकिन अलग-अलग पेशों में किन कौशलों की जरूरत होगी, यह हमें खुद तय करना होगा।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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