महिलाओं के दीर्घकालिक निवेश से 10 साल में जीडीपी पर 40 लाख करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ेगा: रिपोर्ट
महिलाओं के दीर्घकालिक निवेश से 10 साल में जीडीपी पर 40 लाख करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ेगा: रिपोर्ट
मुंबई, पांच मार्च (भाषा) दीर्घकालिक वित्तीय निवेश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से 10 साल की अवधि में लगभग 40 लाख करोड़ रुपये (430 अरब अमेरिकी डॉलर) के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बराबर संचयी प्रभाव उत्पन्न हो सकता है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
लैक्समी और ईवाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रभाव महिलाओं की अप्रयुक्त बचत को उत्पादक, वृद्धि उन्मुख क्षेत्र में लगाने से उत्पन्न होगा। इसे एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर बताया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘दीर्घकालिक वित्तीय निवेश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से प्रभावी पूंजी निर्माण और उस पूंजी से उत्पन्न आर्थिक उत्पादन में वृद्धि के माध्यम से 10 वर्षों की अवधि में लगभग 40 लाख करोड़ रुपये (430 अरब डॉलर) के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बराबर संचयी प्रभाव उत्पन्न हो सकता है।’’
वित्तीय समावेश में महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद, रिपोर्ट में ‘‘भागीदारी और क्षमता के बीच के अंतर’’ की लगातार मौजूदगी को उजागर किया गया है।
लैक्समी और ईवाई के महिला वित्तीय समृद्धि सूचकांक के अनुसार, भारत में महिलाओं के लिए स्थायी संपत्ति तक पहुंच की यात्रा का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा संरचनात्मक रूप से अवरुद्ध है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां महिलाओं के बैंक खातों का स्वामित्व 2011 में 26 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 89 प्रतिशत से अधिक हो गया है, वहीं कई खाते बचत, लेन-देन या निवेश के लिए मंच के रूप में काम करने के बजाय मुख्य रूप से सरकारी अंतरण या नकद निकासी के माध्यम के रूप में कार्य करते हैं।
रिपोर्ट में सेवानिवृत्ति के समय के महत्वपूर्ण अंतर का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत में महिलाओं के पास पुरुषों की तुलना में 40 प्रतिशत कम सेवानिवृत्ति संपत्ति है, जबकि ओईसीडी (आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) देशों में यह अंतर 26 प्रतिशत है।
भाषा रमण अजय
अजय

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