एलपीजी उत्पादन करने वाली इकाइयों को अब मिलेगी गैस आवंटन में प्राथमिकता

एलपीजी उत्पादन करने वाली इकाइयों को अब मिलेगी गैस आवंटन में प्राथमिकता

एलपीजी उत्पादन करने वाली इकाइयों को अब मिलेगी गैस आवंटन में प्राथमिकता
Modified Date: March 10, 2026 / 04:25 pm IST
Published Date: March 10, 2026 4:25 pm IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आयात प्रभावित होने के बीच एक सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि अब घरेलू रूप से उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर उन इकाइयों को की जाएगी, जो इसका उपयोग एलपीजी उत्पादन के लिए करती हैं।

अभी तक संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और घरों में पाइप के जरिये पहुंचाई जाने वाली रसोई गैस (पीएनजी) ही ऐसे दो प्राथमिकता वाले क्षेत्र थे जिन्हें कच्चे माल के रूप में घरेलू प्राकृतिक गैस मिलती थी।

हालांकि, सोमवार देर रात एक गजट अधिसूचना जारी होने के बाद एलपीजी को भी प्राकृतिक गैस पाने वाले प्राथमिक क्षेत्रों की सूची में शामिल कर लिया गया है।

एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और घरों में पाइप से मिलने वाली रसोई गैस को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है ताकि इनकी जरूरत पहले पूरी की जा सके। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी और उसके बाद ही अन्य क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में सरकार ने रिफाइनरियों से एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने को कहा है।

एलपीजी मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस के प्रसंस्करण से प्राप्त होती है और कच्चे तेल की रिफाइनिंग के समय भी एक उप-उत्पाद के रूप में निकलती है। इसे प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों को अलग कर शुद्ध करने के बाद तैयार किया जाता है।

उर्वरक क्षेत्र को इस सूची में दूसरी प्राथमिकता दी गई है और उसकी पिछले छह महीने की औसत मांग का कम-से-कम 70 प्रतिशत पूरा किया जाएगा।

इस सूची में तीसरे स्थान पर चाय उद्योग, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। इन्हें परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीने की औसत गैस खपत का लगभग 80 प्रतिशत उपलब्ध कराया जाएगा।

शहरी गैस वितरण (सीजीडी) से जुड़ी कंपनियों द्वारा औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को की जाने वाली आपूर्ति को प्राथमिकता सूची में चौथे स्थान पर रखा गया है।

भारत में घरेलू गैस उत्पादन लगभग 19.1 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन की कुल खपत का करीब आधा हिस्सा ही पूरा कर पाता है। ऐसे में पश्चिम एशिया संकट के कारण गैस आपूर्ति बाधित होने से प्राथमिकता तय करने का फैसला किया गया है।

सरकार ने कहा कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को आपूर्ति बनाए रखने के लिए पेट्रोरसायन संयंत्रों, बिजली इकाइयों और ऊंची कीमत पर गैस खरीदने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली गैस में कटौती की जा सकती है।

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग छिड़ने से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री यातायात में कमी आई है और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा और एलएनजी की लगभग एक-तिहाई आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।

पाइपलाइन संचालन के लिए जरूरी कंप्रेसर ईंधन एवं अन्य उत्पादों को भी प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि इनके बिना गैस पाइपलाइन का संचालन हो पाना संभव नहीं है।

अधिसूचना में कहा गया है कि एलएनजी आपूर्ति में व्यवधान के प्रभाव को कम करने के लिए तेल रिफाइनिंग कंपनियां अपनी रिफाइनरियों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति को पिछले छह महीनों की औसत खपत के लगभग 65 प्रतिशत तक घटाकर इस असर को यथासंभव उठाएंगी।

अधिसूचना के मुताबिक, सरकारी स्वामित्व वाली गैस कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड को प्राथमिकता पर आधारित इस व्यवस्था को लागू करने के लिए प्राकृतिक गैस आपूर्ति प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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