पश्चिम एशिया संकट : पीएनजी पर ऊंचे वैट से मप्र के छोटे उद्योग परेशान, दर में कटौती की मांग

पश्चिम एशिया संकट : पीएनजी पर ऊंचे वैट से मप्र के छोटे उद्योग परेशान, दर में कटौती की मांग

पश्चिम एशिया संकट : पीएनजी पर ऊंचे वैट से मप्र के छोटे उद्योग परेशान, दर में कटौती की मांग
Modified Date: May 13, 2026 / 08:58 pm IST
Published Date: May 13, 2026 8:58 pm IST

इंदौर, 13 मई (भाषा) मध्यप्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ने बुधवार को राज्य सरकार से औद्योगिक उपयोग वाली पाइप वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) पर 14 प्रतिशत की दर से वसूले जा रहे मूल्य संवर्धित कर (वैट) में कटौती की मांग की।

उद्योग संगठनों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन महंगा होने से एमएसएमई की उत्पादन लागत बढ़ गई है और पीएनजी पर ऊंचे वैट के कारण उन्हें पड़ोसी राज्यों के उद्यमों से प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ रहा है।

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की शिकायत निवारण समिति की इंदौर में आयोजित बैठक के दौरान एमएसएमई संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश’ ने औद्योगिक उपयोग वाली पीएनजी पर ऊंचे वैट का मुद्दा उठाया।

एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश मेहता ने बैठक के बाद ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में पहले ही बड़ी वृद्धि हो चुकी है। मध्यप्रदेश में औद्योगिक उपयोग वाली पीएनजी पर लगने वाला 14 प्रतिशत वैट एमएसएमई की उत्पादन लागत पर बड़ा बोझ डाल रहा है। ऊंचे वैट के कारण मध्यप्रदेश के एमएसएमई पड़ोसी राज्यों के उद्यमों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों में औद्योगिक उपयोग वाली पीएनजी पर वैट की दर तीन से पांच प्रतिशत के बीच है।

मेहता ने कहा कि चूंकि पीएनजी फिलहाल जीएसटी के दायरे में नहीं है, इसलिए उद्योगों को इसकी खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ भी नहीं मिल रहा है।

उन्होंने मांग की, ‘‘पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट के मद्देनजर एमएसएमई को राहत देने के लिए या तो पीएनजी पर वैट घटाया जाए या इसे जीएसटी के दायरे में लाया जाए।’’

जीएसटी की शिकायत निवारण समिति की बैठक में उद्योग-व्यापार जगत के प्रतिनिधियों के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के कर अधिकारी शामिल हुए। बैठक में उद्योग-व्यापार जगत की ओर से जीएसटी रिटर्न भरने की प्रक्रिया को आसान बनाए जाने की मांग भी की गई।

भाषा हर्ष

राजकुमार अजय

अजय


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