पश्चिम एशिया संकट से एमएसएमई पर दबाव, आय और मुनाफे में गिरावट की आशंका: क्रिसिल

पश्चिम एशिया संकट से एमएसएमई पर दबाव, आय और मुनाफे में गिरावट की आशंका: क्रिसिल

पश्चिम एशिया संकट से एमएसएमई पर दबाव, आय और मुनाफे में गिरावट की आशंका: क्रिसिल
Modified Date: June 2, 2026 / 07:26 pm IST
Published Date: June 2, 2026 7:26 pm IST

नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पर दबाव बढ़ने की आशंका है जिससे उनकी आय और मुनाफे में गिरावट आ सकती है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई।

‘क्रिसिल इंटेलिजेंस’ की एमएसएमई क्षेत्र पर जारी नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में इस क्षेत्र की आय वृद्धि घटकर 7.5-8.5 प्रतिशत रह सकती है, जो 2025-26 के मुकाबले करीब एक प्रतिशत कम है। वहीं, कर-पूर्व आय (एबिटर) मार्जिन 0.5 से एक प्रतिशत तक घटकर 5-5.5 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है।

रिपोर्ट कहती है कि यह क्षेत्र कच्चे माल की उपलब्धता में कमी और व्यापारिक बाधाओं के कारण दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। ऊर्जा-आधारित कच्चे माल की कमी से उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जबकि बढ़ती लागत को ग्राहकों पर पूरी तरह डाल पाने की सीमित क्षमता से मुनाफा दबाव में है।

क्रिसिल के मुताबिक, गुजरात के मोरबी, सूरत एवं वडोदरा और उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जैसे औद्योगिक केंद्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इन जगहों पर एमएसएमई उद्यमों की एक बड़ी संख्या मौजूद है।

सिरेमिक टाइल उत्पादन का 80 प्रतिशत से अधिक उत्पादन करने वाले मोरबी में गैस पर निर्भरता अधिक होने के कारण एमएसएमई की आय वृद्धि 2026-27 में घटकर एक-तीन प्रतिशत रह सकती है, जबकि पिछले वर्ष यह नौ-11 प्रतिशत थी।

इसी तरह, फिरोजाबाद के कांच उद्योग का उत्पादन भी करीब 40 प्रतिशत घट चुका है और वहां एमएसएमई की आय वृद्धि भी एक-तीन प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रसायन उद्योग के एमएसएमई भी इस संकट की चपेट में आते दिख रहे हैं। वडोदरा के रसायन उद्योग में कच्चे माल की कीमतें 1.2 से 1.4 गुना तक बढ़ चुकी हैं, जिससे वहां एमएसएमई का मार्जिन 2026-27 में घटकर तीन से पांच प्रतिशत रह सकता है।

इसके अलावा, डीजल कीमतों में वृद्धि से सड़क निर्माण जैसे क्षेत्रों पर भी असर पड़ेगा। डिब्बाबंद खाद्य उत्पाद क्षेत्र में बढ़ती पैकेजिंग लागत से भी मार्जिन दबाव में रहेगा, जो घटकर 6-6.5 प्रतिशत तक आ सकता है।

हालांकि, घरेलू रत्न एवं आभूषण बाजार में सोने की कीमतें चढ़ने से कुछ राहत मिली है, लेकिन समग्र रूप से एमएसएमई क्षेत्र पर दबाव बना रहने की आशंका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट भी कोविड महामारी की तर्ज पर चल रहा है, जिसमें छोटे उद्यमों पर अपेक्षाकृत अधिक असर पड़ रहा है। कोविड-19 के दौरान बड़े उद्यमों की आय 2020-22 में एक प्रतिशत तक घटी थी, जबकि एमएसएमई क्षेत्र में तीन-पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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