पश्चिम एशिया संकट से भारत के व्यापार, वृहद आर्थिक स्थिरता को जोखिम: नीति रिपोर्ट
पश्चिम एशिया संकट से भारत के व्यापार, वृहद आर्थिक स्थिरता को जोखिम: नीति रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) नीति आयोग ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव से चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़ने और विनिमय दर पर दबाव पड़ने से भारत की व्यापार और वृहद आर्थिक स्थिरता को जोखिम है।
आयोग ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के लिए ‘ट्रेड वॉच’ रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता ने भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की प्रगति को धीमा कर दिया है। इससे व्यापार विविधीकरण और बाजार पहुंच प्रभावित हुई है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ‘‘यह स्पष्ट होना चाहिए कि एफटीए एकतरफा नहीं होते और न ही होने चाहिए। कहने का तात्पर्य यह है कि जिस तरह हम इन्हें बाजार पहुंच के साधन के रूप में देख रहे हैं, उसी तरह अन्य लोग भी इन्हें बाजार पहुंच के साधन के रूप में देखते हैं।’’
बेरी ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारत का वस्तु व्यापार मजबूत बना हुआ है और तमाम आशंकाओं के बावजूद, 2025 जैसे बेहद अनिश्चित वर्ष में भी सेवा व्यापार विशेष रूप से मजबूत रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘व्यापार अर्थशास्त्रियों के लिए, निर्यात की तुलना में आयात कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।’’
बेरी ने कहा, ‘‘आयात ही हमें प्रतिस्पर्धी बनने के लिए बाध्य करते हैं, इसलिए हमें बाजार पहुंच के साथ-साथ आयात का भी स्वागत करना चाहिए।’’
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा पिछले 20 साल में भारत ने औसतन छह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो इसकी वृहद आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को मध्यम मूल्य से उच्च मूल्य के निर्यात की ओर बढ़ना चाहिए। डिजाइन-आधारित विनिर्माण, संकुल अनुसंधान एवं विकास और हल्के, फैशन और पुरुषों के आभूषणों को लक्षित करते हुए भौगोलिक संकेतक (जीआई)-ब्रांड वाले उत्पादों को बढ़ावा देना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को कारोबार सुगमता और कच्चे माल की उपलब्धता को मुक्त व्यापार समझौतों के अनुरूप मजबूत करना चाहिए, शुल्क वापसी/रिफंड को सुव्यवस्थित करना और कच्चे माल की आपूर्ति में सुधार करना चाहिए ताकि कच्चे माल की लागत कम हो और एमएसएमई का लाभ बढ़े।’’
रिपोर्ट में वित्तीय पहुंच का विस्तार करने और पूंजी की लागत को कम करने का भी सुझाव दिया गया है। इसके तहत एमएसएमई के लिए बिना गारंटी कर्ज, क्रेडिट गारंटी, ब्याज सब्सिडी और आपूर्ति श्रृंखला वित्त का सुझाव दिया गया है।
इसमें कारोबार सुगमता और डेटा प्रणाली में सुधार करने की भी बात कही गयी है। इसके तहत सीमा शुल्क/डीजीएफटी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, पुनर्आयात/निर्यात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और साक्ष्य-आधारित नीति और निगरानी के लिए अलग-अलग रत्न एवं आभूषण आंकड़े तैयार किये जाने चाहिए।
भाषा रमण अजय
अजय

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