बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन, पाम-पामोलीन में गिरावट, सोयाबीन एवं मूंगफली तेल-तिलहन में सुधार
बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन, पाम-पामोलीन में गिरावट, सोयाबीन एवं मूंगफली तेल-तिलहन में सुधार
नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) सरसों की नई फसल की आवक बढ़ने के बीच देश के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन तथा मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट का रुख रहने के बाद कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल के दाम गिरावट के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर, कम उपलब्धता के बीच सोयाबीन तेल-तिलहन तथा अच्छी गुणवत्ता के तिलहन और खाद्य तेलों की मांग होने से मूंगफली तेल-तिलहन तथा बिनौला तेल के दाम सप्ताहांत में सुधार दर्शाते बंद हुए।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि होली से पहले कामकाज सुस्त बना हुआ था और जो होली के लिए लिवाली की जानी थी वह हो चुकी है। सप्ताहांत में ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमले के बाद आपूर्ति प्रभावित होने की भी आशंकाएं पैदा हुई हैं और अगले सप्ताह के कारोबार के दौरान आगे बाजार की चाल का पता लगेगा।
इस बीच, शुक्रवार देर रात को सरकार ने आयात होने वाले खाद्य तेलों के आयात शुल्क मूल्य में वृद्धि की है। इस वृद्धि के तहत कच्चे पामतेल के आयात शुल्क मूल्य में 26 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन में 124 रुपये क्विंटल और सोयाबीन डीगम में 15 रुपये क्विंटल की वृद्धि की गई है।
सूत्रों ने कहा कि बीते सप्ताह में सरसों की नई फसल की आवक बढ़ती दिखी। लेकिन इस बीच कुछ समीक्षकों को सरसों के रकबे में वृद्धि के मद्देनजर सरसों का उत्पादन बढ़ने का अनुमान जताते देखा गया। अधिक उत्पादन अनुमान से सरसों पहले से कहीं अधिक दबाव में है। साथ ही इन समीक्षकों को यह मांग करते भी देखा गया कि सरकार को सोयाबीन की तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दाम पर बिकवाली के एवज में किसानों को इसके अंतर का भुगतान करना चाहिये। उनकी इस टिप्पणी से सरसों के दाम और भी अधिक दबाव में आ गये।
सूत्रों ने कहा कि यह टिप्पणी सरसों का भाव और तोड़ने के मकसद से प्रेरित हो सकता है। भाव टूटने पर कारोबारी किसानों से नीचे दाम पर सरसों का स्टॉक जमा कर बाद में दाम मनमाना बढ़ा सकते हैं। ऐसे में स्टॉक की कमी का सामना कर रही सरकार को इस वर्ष सरसों का 20-25 लाख टन का स्टॉक बनाने के बारे में सोचना चाहिये। इससे किसानों को फसल के अच्छे दाम भी मिल जायेंगे और कारोबारियों की मनमानी की स्थिति में सरकार बाजार हस्तक्षेप करने की सहज स्थिति में भी होगी। इस बात को ध्यान में रखा जाना चाहिये कि सरसों का कोई विकल्प नहीं है। बाकी तेलों की कमी को आयात से पूरा किया जा सकता है पर सरसों के बारे में ऐसा सोचना मुश्किल है।
सूत्रों ने कहा कि पिछले साल सरकार के पास सरसों का 15-16 लाख टन का स्टॉक था। इन्हीं कारोबारियों ने आम प्रचलन के तहत खरीद के समय अफवाहें फैलाकर सरसों को दाम तोड़कर किसानों से सरसों की खरीद कर उसका स्टॉक कर लिया और बाद में जब सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,950 रुपये क्विंटल था, उस वक्त खुले बाजार में इसका दाम बढ़ाकर लगभग 7,000 रुपये क्विंटल तथा प्लांट डिलिवरी का भाव 7,600-7,700 रुपये क्विंटल कर दिया था। यानी आयातित तेल के भी मुकाबले सरसों का भाव 40-45 रुपये किलो अधिक हो गया था। इस तथ्य के मद्देनजर भी सरकार को अभी सरसों का स्टॉक बना लेना होगा।
सूत्रों ने कहा कि कम दाम होने की वजह से किसानों की ओर से आवक की कमी होने के कारण बाजार में सोयाबीन की उपलब्धता कम होने के बीच बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में सुधार देखा गया। ईरान पर हमले की खबर के बाद आपूर्ति चिंताओं के कारण भी सोयाबीन तेल-तिलहन में तेजी को मदद मिली।
उन्होंने कहा कि उपलब्धता में कमी की तथा अच्छी गुणवत्ता के मूंगफली दाने और खाद्य तेल की मांग होने के कारण बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में भी सुधार देखा गया।
सूत्रों ने कहा कि बीते सप्ताह मलेशिया एक्सचेंज में अधिकतम गिरावट का रुख रहने के बीच पाम-पामोलीन तेल के दाम में गिरावट देखी गई। वैसे ईरान पर हुए हमले के बाद आपूर्ति की स्थिति तथा इस तेल के दाम के बारे में अंदाजा सोमवार के कामकाज से मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि कम आवक और मांग होने के कारण बीते सप्ताह बिनौला तेल के दाम में भी सुधार आया। मंडियों में कपास नरमा का दाम एमएसपी से 10-12 प्रतिशत नीचे है इस वजह से इसकी आवक प्रभावित है।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 200 रुपये की गिरावट के साथ 6,475-6,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 350 रुपये की गिरावट के साथ 13,450 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 40-40 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 2,285-2,385 रुपये और 2,285-2,430 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 75-75 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 5,350-5,400 रुपये और 4,950-5,000 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 50 रुपये के सुधार के साथ 14,450 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 150 रुपये के सुधार के साथ 14,150 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 50 रुपये के सुधार के साथ 11,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
बीते सप्ताह, मूंगफली तिलहन 50 रुपये के सुधार के साथ 7,000-7,475 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 100 रुपये के सुधार के साथ 17,100 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 15 रुपये के सुधार के साथ 2,690-2,990 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 25 रुपये की गिरावट के साथ 11,775 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 100 रुपये की गिरावट के साथ 13,600 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 150 रुपये की गिरावट के साथ 12,450 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
वहीं बिनौला तेल का दाम 150 रुपये के सुधार के साथ 13,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
भाषा राजेश
अजय
अजय

Facebook


