एनसीएलएटी ने टैगुडा की याचिका खारिज की, उषदेव इंटरनेशनल के परिसमापन के फैसले को रखा बरकरार

एनसीएलएटी ने टैगुडा की याचिका खारिज की, उषदेव इंटरनेशनल के परिसमापन के फैसले को रखा बरकरार

एनसीएलएटी ने टैगुडा की याचिका खारिज की, उषदेव इंटरनेशनल के परिसमापन के फैसले को रखा बरकरार
Modified Date: July 6, 2026 / 08:21 pm IST
Published Date: July 6, 2026 8:21 pm IST

नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने सिंगापुर की कंपनी टैगुडा की याचिका खारिज करते हुए उषदेव इंटरनेशनल की परिसमापन कार्यवाही को बरकरार रखा है।

न्यायाधिकरण ने कहा कि आवेदक तीन साल से अधिक समय तक अपनी समाधान योजना को लागू कर पाने में लगातार विफल रहा है, जिस कारण एनसीएलटी के पास परिसमापन का आदेश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ के आदेश को बरकरार रखा है। इस आदेश में लौह धातु के कारोबार और पवन ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र की कंपनी उषदेव इंटरनेशनल की परिसमापन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था।

उषदेव इंटरनेशनल के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों में शामिल टैगुडा की ओर से तत्काल 227 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश पर एनसीएलएटी ने कहा कि इस प्रस्ताव को हितधारक परामर्श समिति अपनी बैठकों में पहले ही खारिज कर चुकी है।

न्यायमूर्ति एन. सेषासायी और तकनीकी सदस्य अरुण बरोक्का की पीठ ने टिप्पणी की कि चार साल बाद भी भुगतान की मंशा स्पष्ट नहीं है तथा यह प्रस्ताव केवल प्रक्रिया को लंबा खींचने का प्रयास है।

एनसीएलएटी ने टैगुडा पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे पीएम केयर्स फंड में जमा करना होगा। न्यायाधिकरण ने कहा कि कंपनी ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर कार्यवाही को अनावश्यक रूप से लंबा खींचा है।

उषदेव इंटरनेशनल के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) 17 मई, 2018 को शुरू हुई थी।

बाद में एनसीएलटी ने 2019 में टैगुडा की बोली को मंजूरी दी थी, लेकिन एनसीएलएटी ने इसपर रोक लगा दी थी और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था।

भाषा यासिर अजय

अजय


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