‘लेबल’ से जुड़े मामलों में जेल की सजा का प्रावधान हटाने की जरूरत: ईएसी-पीएम

‘लेबल’ से जुड़े मामलों में जेल की सजा का प्रावधान हटाने की जरूरत: ईएसी-पीएम

‘लेबल’ से जुड़े मामलों में जेल की सजा का प्रावधान हटाने की जरूरत: ईएसी-पीएम
Modified Date: September 21, 2023 / 08:35 pm IST
Published Date: September 21, 2023 8:35 pm IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने सुझाव दिया है कि वाणिज्यिक क्षेत्र में उपभोक्ता उत्पादों के ‘लेबल’ में गड़बड़ी से संबंधित मामलों में जुर्माना व्यवस्था अपनायी जाए जबकि जेल की सजा के प्रावधान को हटा दिया जाना चाहिए।

ईएसी-पीएम ने ‘विधिक माप विज्ञान व्यवस्था में सुधार’ शीर्षक वाले अपने परिचर्चा पत्र में कहा है कि अगर देश जेल की सजा के प्रावधान को बरकरार रखने का फैसला करता है, तो यह केवल गंभीर मामलों और बार-बार होने वाले अपराधों के लिये ही होना चाहिए। साथ ही यह इस रूप में होना चाहिए जिससे उपभोक्ता अधिकारों की पर्याप्त रूप से रक्षा हो सके।

आर्थिक सलाहकार परिषद ने कहा, ‘‘हमने अन्य देशों का जो विश्लेषण किया है, उससे पता चलता है कि भारत को श्रेणीबद्ध जुर्माना व्यवस्था का विकल्प अपनाना चाहिए (जैसा कि कुछ राज्यों ने सुझाव दिया है, चौथे अपराध तक ऐसा ही होना चाहिए) और कारावास के प्रावधानों को हटा देना चाहिए।’’

परिचर्चा पत्र में कहा गया है कि पैकेजिंग नियमों की जटिलता मापतौल निरीक्षकों को छोटे-छोटे मामलों में नोटिस जारी करने का अवसर प्रदान करती है।

इसमें कहा गया है, ‘‘अनजाने में होने वाले नियमों की चूक पर सख्ती से कार्रवाई की जाती है, जिससे उद्यमियों को अनुचित रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जबकि उन नियमों के चूक से खास असर नहीं पड़ता।’’

विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 वाणिज्यिक क्षेत्र में उपयोग किये जाने वाले वजन, माप और लेबल के मानक को स्थापित और लागू करता है। इस अधिनियम में कठोर दंडात्मक प्रावधानों और इसके ‘लेबलिंग’ नियमों की जटिलता को लेकर लंबे समय से इसकी आलोचना होती रही है। यह भारत में कारोबार सुगमता को और बेहतर बनाने में एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

इस अधिनियम के तहत अपराध के लिए सजा के रूप में जेल की सजा का प्रावधान है।

परिचर्चा पत्र में 2011 के पैकेजिंग नियमों को सरल बनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि सरकार गलती करने वाले उद्यमियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने से पहले तकनीकी गलतियों को ठीक करने को लेकर नोटिस जारी करने की एक प्रणाली स्थापित करने के लिये प्रक्रिया में बदलाव पर विचार कर सकती है।

इसमें कहा गया है, ‘‘जटिल और कठोर प्रणाली को कुछ सरल बनाने के लिये आयातित वस्तुओं के मामले में मौजूदा ‘लेबल’ पर स्टिकर का उपयोग जैसे लागत प्रभावी सुधारात्मक उपायों पर विचार किया जा सकता है।’’

परिचर्चा पत्र के अनुसार, पैकेजिंग नियमों की आवश्यकताओं में बार-बार बदलाव से अनुपालन कठिन और महंगा हो जाता है।

इसमें कहा गया है, ‘‘बार-बार बदलाव से उद्यमियों के लिये उल्लंघन का खतरा भी बढ़ जाता है क्योंकि आपूर्ति श्रृंखला में हमेशा ऐसी पैकेजिंग सामग्री होगी जो नये नियमों का अनुपालन नहीं करती है और उन्हें उसे वापस लेना पड़ता है।’’

परिचर्चा पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि सरकार ‘लेबल’ संबंधित बदलाव से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के नियमों को एक साथ लाने का उपाय कर सकती है। साथ ही उसे पूर्व-घोषित तय तिथियों पर वर्ष में दो बार अधिसूचित कर सकती है।

भाषा

रमण अजय

अजय


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