शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह बीते वित्त वर्ष बढ़कर 23.40 लाख करोड़ रुपये पर, संशोधित लक्ष्य से कम
शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह बीते वित्त वर्ष बढ़कर 23.40 लाख करोड़ रुपये पर, संशोधित लक्ष्य से कम
नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) सरकार का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह वित्त वर्ष 2025-26 में 5.12 प्रतिशत बढ़कर 23.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। हालांकि यह मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए तय संशोधित बजट लक्ष्य से कम है।
वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में सरकार ने प्रत्यक्ष कर संग्रह 24.21 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। मूल बजट अनुमान 25.20 लाख करोड़ रुपये था।
विश्लेषकों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष कर संग्रह में अपेक्षाकृत नरमी आयकर दरों में की गई कटौती के कारण रही, जिसकी घोषणा एक फरवरी 2025 को पेश बजट में की गई थी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अप्रैल 2025 से प्रभावी आयकर छूट की सीमा सात लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी थी। साथ ही कर दरों और स्लैब में व्यापक बदलाव किए गए तथा मानक कटौती बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दी गई। इन कदमों का उद्देश्य करदाताओं के हाथ अधिक पैसा छोड़कर अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देना था।
संशोधित अनुमान में कंपनी कर से 11.09 लाख करोड़ रुपये और आयकर (प्रतिभूति लेनदेन कर सहित) से 13.12 लाख करोड़ रुपये का संग्रह शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध कंपनी कर संग्रह 11.4 प्रतिशत बढ़कर 10.99 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि गैर-कंपनी कर संग्रह 11.83 लाख करोड़ रुपये पर स्थिर रहा।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिभूति लेनदेन कर संग्रह 7.9 प्रतिशत बढ़कर 57,522 करोड़ रुपये रहा।
वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (कंपनी और गैर-कंपनी कर सहित) 23.40 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2024-25 में संग्रहित 22.26 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 5.12 प्रतिशत अधिक है।
कर वापसी (रिफंड) जारी करने में सालाना आधार पर 1.09 प्रतिशत की कमी आई और यह 2025-26 में 4.71 लाख करोड़ रुपये रहा।
वित्त वर्ष 2025-26 में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह लगभग 28.12 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2024-25 की तुलना में 4.03 प्रतिशत अधिक है।
ईवाई इंडिया के कर साझेदार जयेश सांघवी ने कहा कि बजट में आयकर दरों में कटौती के कारण गैर-कंपनी कर संग्रह प्रभावित होने की उम्मीद थी।
उन्होंने कहा, “मजबूत कंपनी कर वृद्धि और रिफंड प्रबंधन ने कुल वृद्धि को 5.12 प्रतिशत बनाए रखने में मदद की।”
डेलॉयट इंडिया के साझेदार रोहिंटन सिधवा ने कहा कि बड़ी दर कटौती के बावजूद गैर-कंपनी कर राजस्व अपेक्षाकृत स्थिर रहा है। यह प्रत्यक्ष कर संग्रह का सबसे बड़ा हिस्सा है और यह करदाताओं की संख्या तथा लेनदेन में वृद्धि को दर्शाता है।
भाषा योगेश रमण
रमण

Facebook


