घरों और इमारतों के अंदर नेटवर्क की समस्या बड़ी चुनौती: ट्राई चेयरमैन

घरों और इमारतों के अंदर नेटवर्क की समस्या बड़ी चुनौती: ट्राई चेयरमैन

घरों और इमारतों के अंदर नेटवर्क की समस्या बड़ी चुनौती: ट्राई चेयरमैन
Modified Date: April 24, 2026 / 08:04 pm IST
Published Date: April 24, 2026 8:04 pm IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन ए. के. लाहोटी ने शुक्रवार को कहा कि मोबाइल डेटा का इस्तेमाल एवं उसकी गति तेजी से बढ़ने के बावजूद लोग घरों और इमारतों के अंदर नेटवर्क की समस्या का सामना कर रहे हैं जिससे निर्माण योजनाओं में डिजिटल संपर्क ढांचे को शामिल करना अब जरूरी हो गया है।

दूरसंचार नियामक ट्राई के चेयरमैन ने यहां ‘सीओएआई डिजिकॉम समिट 2026’ में कहा कि डेटा की मांगों को पूरा करने के लिए केवल मोबाइल नेटवर्क काफी नहीं हैं खासकर कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के समय में…इसलिए नियामक ढांचा एवं नीतियां स्थिर ब्रॉडबैंड नेटवर्क के विस्तार को बढ़ावा दे रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा कि इमारतों के अंदर नेटवर्क की समस्या अब एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। डेटा उपयोग बढ़ने के बावजूद घरों के अंदर खराब सिग्नल की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इसलिए जरूरी है कि भवन निर्माण में डिजिटल संपर्क के लिए ढांचा अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

लाहोटी ने बताया कि इस संबंध में दूरसंचार नियामक ने सरकार को सिफारिशें दी हैं, जिन्हें स्वीकार कर लिया गया है। अब इन्हें भवनों के डिजाइन और निर्माण प्रक्रियाओं में शामिल करना आवश्यक होगा।

उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए दूरसंचार नियामक ने इमारतों में डिजिटल संपर्क की गुणवत्ता के आधार पर ‘रेटिंग’ देने का ढांचा भी तैयार किया है। इससे मकानों और व्यावसायिक इमारतों में संपर्क की गुणवत्ता में सुधार होगा।

ट्राई ने अक्टूबर 2024 में नियम जारी किए थे जिनके तहत मुख्य रूप से आवासीय और व्यावसायिक भवनों को उनकी डिजिटल संपर्क की गुणवत्ता के आधार पर ‘रेटिंग’ दी जाएगी। यह ‘रेटिंग’ दूरसंचार नियामक द्वारा अधिकृत एजेंसी प्रदान करेगी।

लाहोटी ने साथ ही बताया कि ट्राई ने सरकार से दूरसंचार कंपनियों के लिए अतिरिक्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की सिफारिश की है जिसमें 37 से 40 गीगाहर्ट्ज बैंड और 600 मेगाहर्ट्ज बैंड शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि 600 मेगाहर्ट्ज बैंड में भेजे जाने वाले सिग्नल मकानों के अंदर मोबाइल नेटवर्क को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

भाषा योगेश निहारिका

निहारिका


लेखक के बारे में