नए श्रम कानून सरकार, उद्योग और कर्मचारियों के बीच बेहतर संबंधों की दिशा में बदलाव: सचिव
नए श्रम कानून सरकार, उद्योग और कर्मचारियों के बीच बेहतर संबंधों की दिशा में बदलाव: सचिव
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) श्रम सचिव चंद्र भूषण कुमार ने बृहस्पतिवार को नए श्रम कानूनों को नियंत्रण पर केंद्रित नियामकीय व्यवस्था से सरकार, उद्योग और कर्मचारियों के बीच अधिक सहयोग और सुविधा आधारित व्यवस्था की ओर बदलाव बताया।
उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में कुमार ने कानूनों को एक साथ लाकर श्रम व्यवस्था को सरल बनाने का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इसमें प्रावधान में कमी, अनुपालन का डिजिटलीकरण, ई-पोर्टल और एक समान रिटर्न दाखिल करने की व्यवस्था के साथ श्रम की परिभाषा में अधिक एकरूपता लाई गई है।
उन्होंने कहा कि एक पीढ़ी में एक बार होने वाले इस बड़े सुधार को लागू करना सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसके लिए राज्यों के साथ करीबी समन्वय और उद्योग के साथ लगातार संवाद जरूरी है।
कुमार ने कहा कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय औद्योगिक समूहों वाले 316 जिलों में जागरूकता और प्रशिक्षण का समन्वित अभियान चला रहा है। इसके साथ ही राज्यों के श्रम तंत्र को तैयार किया जा रहा है और प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने वाले विशेषज्ञों की भी तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर राज्यों ने अपने नियमों का प्रारंभिक मसौदा सार्वजनिक कर दिया है। श्रम मंत्रालय राज्य स्तर पर नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही, न्यूनतम मजदूरी और श्रम कानूनों के क्रियान्वयन से जुड़े अन्य मुद्दों पर अधिक स्पष्टता देने का काम भी किया जा रहा है।
श्रम सचिव ने कहा कि नई व्यवस्था से ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का मजबूत आधार तैयार हुआ है। मंत्रालय डिजिटल मंच के जरिये सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को आपस में जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि मौजूदा कमियों की पहचान की जा सके और टिकाऊ तथा दीर्घकालिक श्रम मानक विकसित किए जा सकें।
उन्होंने कहा कि अब राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श तथा समन्वय के जरिये सुधारों को लागू करने पर जोर होना चाहिए। इसके लिए धैर्य और समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण जरूरी है।
पीएचडीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष राजीव तलवार ने कहा कि चारों श्रम संहिताओं का क्रियान्वयन केवल नियमन तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें श्रम के औपचारिकीकरण, कौशल विकास, सुरक्षा और श्रमिकों के सम्मानजनक जीवन से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पीएचडीसीसीआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं महासचिव रणजीत मेहता ने कहा कि भारत जब विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में नेतृत्व स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब मजबूत और भविष्य के अनुरूप कार्यस्थल तथा नए श्रम कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होगा।
केंद्र के 29 श्रम कानूनों को चार एकीकृत श्रम संहिताओं में समाहित किया गया है। इनमें से प्रत्येक संहिता श्रम और रोजगार व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण पहलू से संबंधित है।
ये चारों श्रम संहिताएं नवंबर, 2025 में एक साथ लागू हुईं। इनका उद्देश्य श्रमिक कल्याण, नियामकीय स्पष्टता और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने वाली अधिक एकीकृत श्रम प्रशासन व्यवस्था तैयार करना है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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