वायदा खंड में कोई समस्या नहीं, कम अवधि वाले विकल्प कारोबार को लेकर चिंता जरूर: सेबी प्रमुख

वायदा खंड में कोई समस्या नहीं, कम अवधि वाले विकल्प कारोबार को लेकर चिंता जरूर: सेबी प्रमुख

वायदा खंड में कोई समस्या नहीं, कम अवधि वाले विकल्प कारोबार को लेकर चिंता जरूर: सेबी प्रमुख
Modified Date: March 3, 2026 / 02:59 pm IST
Published Date: March 3, 2026 2:59 pm IST

मुंबई, तीन मार्च (भाषा) सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा है कि नियामक को डेरिवेटिव (वायदा एवं विकल्प) बाजार के वायदा खंड को लेकर कोई चिंता नहीं है, लेकिन कम समय के सौदे वाले विकल्प कारोबार में सट्टेबाजी की गतिविधियों को लेकर वह सतर्क है।

पांडेय ने कहा कि नियामक के हाल में किये गये गये हस्तक्षेप विशेष रूप से अल्पावधि वाले विकल्प कारोबार में अत्यधिक गतविधियों पर अंकुश लगाने पर केंद्रित रहे हैं। साथ ही मूल्य निर्धारण और नकदी में वायदा और विकल्प की महत्वपूर्ण भूमिका को भी संरक्षित किया जा रहा है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख ने डेरिवेटिव खंड से संबंधित एक सवाल के जवाब में कहा कि इस मुद्दे को सामान्य रूप से एफ एंड ओ (वायदा एवं विकल्प) से संबंधित मुद्दा नहीं कहा जाना चाहिए।

उन्होंने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा, ‘‘आपको इसे वायदा एवं विकल्प नहीं कहना चाहिए क्योंकि वायदा को लेकर हमें कभी कोई समस्या नहीं रही है। अल्पावधि विकल्पों को लेकर जरूर समस्या है।’’

पांडेय ने कहा कि सेबी ने छोटी अवधि वाले विकल्प कारोबार में अत्यधिक गतिविधियों को लक्षित करते हुए पहले ही कई नियामकीय उपाय लागू किए हैं। ये उपाय अक्टूबर, 2024 और मई, 2025 में लागू किए गए थे, जिनका चरणबद्ध कार्यान्वयन जुलाई, अक्टूबर और दिसंबर में हुआ।

नियामक अब बाजार आंकड़ों के आधार पर इन हस्तक्षेपों के प्रभाव का आकलन कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम आंकड़ों के आधार पर इसके प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। अगर हमें लगता है कि अभी भी कदम उठाने की आवश्यकता है, तो हम उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न तरीकों पर विचार करेंगे और परामर्श का एक और दौर आयोजित करेंगे।’’

अल्पावधि के विकल्प कारोबार ऐसे डेरिवेटिव हैं जो या तो उसी दिन या कुछ दिन के भीतर समाप्त हो जाते हैं। ये सस्ते होते हैं और कम राशि (प्रीमियम) से ही बड़ा ‘पोजिशन’ प्रदान करते हैं। इससे कारोबारी बहुत ही अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव पर दांव लगा सकते हैं या उनसे बचाव कर सकते हैं। हालांकि, ये अत्यधिक अस्थिर होते हैं और बहुत तेजी से अपना मूल्य खो देते हैं, जिससे ये खुदरा निवेशकों के लिए अत्यधिक जोखिम भरे हो जाते हैं।

सेबी प्रमुख ने कहा कि वायदा बाजार और व्यापक डेरिवेटिव खंड मूल्य निर्धारण और तरलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहतर है कि हम उन समस्याग्रस्त क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करें जिनकी पहचान स्वयं सेबी ने की है और आंकड़े भी जारी किये गये हैं। हमने वैधानिक चेतावनी जारी की है, उपाय लागू किए हैं और उनके प्रभाव का विश्लेषण करना जारी रखेंगे…।’’

इससे पहले जुलाई में, सेबी ने अति-अल्पावधि डेरिवेटिव ट्रेडिंग के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की थी और चेतावनी दी थी कि इस तरह का रुख भारत के पूंजी बाजारों की सेहत को कमजोर कर सकते हैं।

निम्न आय वर्ग के लोगों को डेरिवेटिव कारोबार से बाहर रखने के सुझावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, सेबी प्रमुख ने कहा कि नियामक को विभिन्न पक्षों से कई सिफारिशें प्राप्त होती हैं।

पांडेय ने प्रस्ताव पर तत्काल कोई कदम उठाने का संकेत दिए बिना कहा, ‘‘हर कोई सुझाव दे सकता है। हमें ईमेल और सोशल मीडिया के माध्यम से कई सुझाव मिलते हैं।’’

पिछले सप्ताह, एनएसई के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीषकुमार चौहान ने डेरिवेटिव कारोबार में भाग लेने वालों के लिए ‘न्यूनतम योग्यता मानदंड’ निर्धारित करने की वकालत की थी, ताकि समाज के निचले तबके के लोग सट्टेबाजी में अपना पैसा बर्बाद न करें।

सेबी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 90 प्रतिशत से अधिक कारोबारी डेरिवेटिव कारोबार में पैसा गंवा देते हैं।

एनएसई के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के संबंध में, सेबी प्रमुख ने कहा कि अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लंबे समय से लंबित था। इसका मतलब है कि अब शेयर बाजार को तैयारी शुरू करने की अनुमति मिल गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मंजूरी केवल एक प्रारंभिक कदम है और आईपीओ में कुछ समय लगता है।

पांडेय ने कहा, ‘‘अभी बहुत सारी तैयारियां करनी हैं। डीआरएचपी (विवरण पुस्तिका का मसौदा) प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। यह एक प्रारंभिक एनओसी है क्योंकि यह एक बाजार बुनियादी ढांचा संस्थान है। उन्हें तैयारी करने की अनुमति मिल गई है और उसके बाद डीआरएचपी प्रक्रिया, जनता की टिप्पणियां और फिर आरएचपी (विवरण पुस्तिका) होगी। इसलिए, इसमें समय लगेगा।’’

उल्लेखनीय है कि सेबी ने जनवरी में एनओसी दिया है, जिससे लगभग एक दशक की देरी के बाद शेयर बाजार को अपनी सूचीबद्धता योजनाओं के साथ आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया।

भाषा रमण अजय

अजय


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