पेट्रोल-डीजल पर घाटे के बावजूद तेल कंपनियों को राहत देने का प्रस्ताव नहींः अधिकारी
पेट्रोल-डीजल पर घाटे के बावजूद तेल कंपनियों को राहत देने का प्रस्ताव नहींः अधिकारी
नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन (एटीएफ) की खुदरा बिक्री पर सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय समर्थन देने का सरकार के पास फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सोमवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, “तेल विपणन कंपनियों को उनके नुकसान के लिए समर्थन देने का कोई भी प्रस्ताव सरकार के समक्ष नहीं है।”
सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) पिछले दो महीनों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम नहीं बढ़ा रही हैं।
कच्चे तेल की लागत बढ़ने और खुदरा दाम में स्थिरता की वजह से इन पेट्रोलियम कंपनियों को प्रति लीटर 25-28 रुपये तक का ‘अंडर-रिकवरी’ (लागत से कम कीमत पर बिक्री) झेलना पड़ रहा है।
इसके अलावा, कंपनियों को दो दशक से अधिक समय में पहली बार एटीएफ पर भी घाटा उठाना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतों में समुचित बढ़ोतरी नहीं की गई है।
पिछले महीने घरेलू एटीएफ कीमतों में 25 प्रतिशत वृद्धि की गई थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए मई में इसका दाम 5.33 प्रतिशत बढ़ाकर 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर कर दिया गया।
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत सात मार्च को 60 रुपये बढ़ाई गई थी, लेकिन यह लागत में हुई बढ़ोतरी की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहा है। इसके चलते कंपनियां एलपीजी पर भी घाटा उठा रही हैं।
हालांकि, अतीत में सरकार एलपीजी पर सब्सिडी के जरिए इस तरह के नुकसान की भरपाई करती रही है।
शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से आपूर्ति बाधित होने के बावजूद उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में वृद्धि नहीं की गई है। हालांकि, औद्योगिक उपयोग वाले डीजल और वाणिज्यिक एलपीजी के दाम बढ़ाए गए हैं जो कुल खपत का केवल 10 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, “उपभोक्तों को संरक्षण देने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया है। कीमतों में बदलाव का फैसला करते समय उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखा गया है।”
शर्मा ने कहा कि तेल विपणन कंपनियों की तरफ से कदम महंगाई पर काबू पाने की मंशा से उठाए गए हैं।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण

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