उपभोक्ताओं को ‘‘जानबूझकर’’ भ्रमित कर रहे खाद्य तेलों के गैर-मानक पैक आकार : प्रसंस्करणकर्ता
उपभोक्ताओं को ‘‘जानबूझकर’’ भ्रमित कर रहे खाद्य तेलों के गैर-मानक पैक आकार : प्रसंस्करणकर्ता
इंदौर (मध्यप्रदेश), 29 अप्रैल (भाषा) प्रसंस्करणकर्ताओं के इंदौर स्थित संगठन सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने खाद्य तेलों की पैकेजिंग में इस्तेमाल किए जा रहे गैर-मानक पैक आकारों को उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक बताते हुए केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
संगठन ने कहा कि कई कंपनियां खाद्य तेलों के ऐसे पैक आकार बाजार में उतार रही हैं जिनसे उपभोक्ता कीमत और मात्रा को लेकर भ्रमित हो रहे हैं।
सोपा के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने बुधवार को बताया कि संगठन ने इस संबंध में केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव को पत्र लिखा है।
पत्र में कहा गया कि खाद्य तेल उद्योग की पांच राष्ट्रीय संस्थाओं ने पहले भी संयुक्त रूप से इस विषय पर प्रस्तुतीकरण देकर उपभोक्ताओं के हित में खाद्य तेलों की पैकेजिंग मात्रा के मानकीकरण की सिफारिश की थी।
पत्र में कहा गया, “ सरकार ने अच्छी मंशा के साथ खाद्य तेलों की पैकेजिंग में मानक मात्रा संबंधी प्रतिबंध हटाए थे और पैकेट पर प्रति इकाई मूल्य की जानकारी देना अनिवार्य किया था। हालांकि, कुछ विनिर्माता इस छूट का दुरुपयोग करते हुए गैर-मानक आकार के पैक बाजार में ला रहे हैं जो उपभोक्ताओं को जान-बूझकर भ्रमित करते हैं।”
इसमें कहा गया कि नियामकीय ढांचा ऐसा होना चाहिए जिसमें “दुरुपयोग या शोषण” की कोई गुंजाइश न रहे।
सोपा ने उन दलीलों को भी खारिज किया जिनमें कहा जाता है कि पैकेट पर प्रति इकाई मूल्य घोषित होने के बाद पैकेजिंग के मानकीकरण की जरूरत नहीं रह जाती और किसी भी आकार का पैक उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी होता है।
संगठन ने कहा, “ यह तर्क निराधार है। सामान्य खुदरा उपभोक्ता प्रति मिलीलीटर या प्रति ग्राम कीमत की गणना करके उसे एक लीटर या एक किलोग्राम की सामान्य इकाई में नहीं बदलता, खासकर तब जब प्रति इकाई मूल्य पैसे में और दशमलव के साथ लिखा जाता है जैसे 24.72 पैसे प्रति मिलीलीटर।”
पत्र में उपभोक्ताओं के भ्रम की स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा गया,“ किसी उपभोक्ता को अक्सर दिखने में लगभग समान दो पाउच बताए जाते हैं जिनमें से एक में 880 मिलीलीटर और दूसरे में 910 मिलीलीटर तेल होता है। 880 मिलीलीटर वाला पाउच कीमत में सस्ता दिखता है जिससे उपभोक्ता उसे बेहतर सौदा समझकर चुन लेता है जबकि प्रति लीटर मूल्य के मान से उसकी वास्तविक कीमत अधिक होती है।”
सोपा ने कहा कि मानकीकरण नहीं होने की स्थिति में नियमों का पालन करने वाली कंपनियां भी प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए गैर-मानक पैक आकार में उत्पाद बेचने को मजबूर हो रही हैं।
संगठन ने अपने पत्र के साथ एक खाद्य तेल ब्रांड का विज्ञापन भी संलग्न किया है जिसमें 19 अलग-अलग पैक आकारों में तेल बेचे जाने का उल्लेख किया गया है।
सोपा के अनुसार इनमें कई पैक आकार में लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं लेकिन उनमें मात्रा अलग-अलग होती है और कई पैक के बीच मात्रा का अंतर केवल 25 या 50 ग्राम का है।
पत्र में कहा गया,“ यह उपभोक्ताओं को भ्रमित करने का स्पष्ट उदाहरण है। बाजार में इस तरह के मामले व्यापक रूप से मौजूद हैं और बिना किसी अपवाद के सामान्य उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं।”
सोपा ने केंद्र सरकार से इस मामले में उपभोक्ताओं के व्यापक हित में शीघ्र और उपयुक्त निर्णय लेने का अनुरोध किया है।
संगठन ने यह भी कहा कि यदि सरकार पैकेजिंग मात्रा के मानकीकरण पर कोई फैसला लेती है, तो कंपनियों को उत्पादन प्रणाली में बदलाव और पहले से उपलब्ध पैकेजिंग सामग्री के इस्तेमाल के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए ताकि उद्योग पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़े।
भाषा हर्ष मनीषा निहारिका
निहारिका

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