दस प्रतिशत तक चीनी हिस्सेदारी वाली कंपनियों को भारत में सीधे निवेश की मंजूरी संबंधी अधिसूचना जारी
दस प्रतिशत तक चीनी हिस्सेदारी वाली कंपनियों को भारत में सीधे निवेश की मंजूरी संबंधी अधिसूचना जारी
नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने सोमवार को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति में बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी जिसके तहत 10 प्रतिशत तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को भारत में स्वचालित मार्ग से निवेश की अनुमति दी गई है।
अधिसूचना के मुताबिक, इस तरह के निवेश संबंधित क्षेत्रों की एफडीआई सीमा एवं शर्तों के अधीन होंगे।
हालांकि, यह छूट चीन या हांगकांग में पंजीकृत कंपनियों या भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों की कंपनियों पर लागू नहीं होगी।
पहले, इन सीमावर्ती देशों के किसी भी शेयरधारक का एक भी शेयर होने पर विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश के लिए सरकार से अनिवार्य मंजूरी लेनी पड़ती थी।
लेकिन अब यह प्रतिबंध केवल ‘लाभकारी स्वामित्व’ पर ही लागू होगा।
अधिसूचना के मुताबिक, भारत में निवेश करने वाली इकाई के ‘लाभकारी स्वामित्व’ का मतलब उस निवेशक इकाई का वास्तविक स्वामी होगा, जो ऐसे देश में पंजीकृत या स्थापित हो जो भारत से भूमि सीमा साझा नहीं करता है।
‘लाभकारी स्वामित्व’ की परिभाषा धनशोधन निवारक अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के अनुरूप होगी।
पीएमएलए नियमों के मुताबिक, नियंत्रणकारी स्वामित्व का मतलब किसी कंपनी के शेयर, पूंजी या मुनाफे में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी होना है।
एफडीआई संबंधी नियमों में इस बदलाव का फैसला केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह किया था। सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए 17 अप्रैल, 2020 को एफडीआई नीति में संशोधन कर प्रेस नोट-3 (2020) जारी किया था।
प्रेस नोट-3 के तहत भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों या ऐसे निवेशकों को भारत में निवेश के पहले सरकार से मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया था।
भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमा और अफगानिस्तान शामिल हैं।
इस नियम से वैश्विक निजी इक्विटी (पीई) और उद्यम पूंजी (वीसी) कोषों समेत कई निवेशकों पर असर पड़ा था। खासकर चीन या हांगकांग के निवेशकों की अल्पांश हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों पर इस संशोधन का अधिक असर देखा गया था।
नवीनतम अधिसूचना के मुताबिक, यदि किसी निवेशक इकाई में इन देशों के नागरिक या इकाइयों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है और उसे सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं है, तो ऐसे निवेशों को डीपीआईआईटी द्वारा निर्धारित मानक प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट करना होगा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2025 के दौरान भारत में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी सिर्फ 0.32 प्रतिशत रही है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय रमण
रमण

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