नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) ओडिशा का दुर्लभ खनिज क्षेत्र वर्ष 2032 तक आठ अरब डॉलर से बढ़कर 18-20 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा, जबकि प्रसंस्करण और विनिर्माण का हिस्सा चार गुना हो जाएगा। एक उद्योग निकाय के अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है।
हाल ही में संपन्न ‘ग्लोबल क्लीनटेक एक्सपो-ओडिशा 2026’ में ‘नेट ज़ीरो एनर्जी ट्रांज़िशन एसोसिएशन’ (एनईटीआरए) के नए अनुमानों के मुताबिक, राज्य दुर्लाभ खनिज क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम उठाने के लिए तैयार है।
अध्ययन से पता चलता है कि ओडिशा खनिज उत्पादन मूल्य वर्ष 2025 के आठ अरब डॉलर से बढ़कर 2032 तक 18-20 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। राज्य की खनन, प्रसंस्करण और विनिर्माण पृष्ठभूमि में बड़ा बदलाव आएगा, जो वर्ष 2025 के 40 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और पांच प्रतिशत से बढ़कर 2032 तक क्रमशः 50 प्रतिशत, 40 प्रतिशत और 30 प्रतिशत हो जाएगा, जो केन्द्रित नीति और औद्योगिक निवेश की वजह से होगा।
पिछले सप्ताह 20-21 फरवरी को भुवनेश्वर में हुए दो दिवसीय ‘ग्लोबल क्लीनटेक एक्सपो-ओडिशा 2026’ का उद्घाटन राज्य के एमएसएमई मंत्री गोकुलानंद मलिक ने किया।
भाषा राजेश राजेश अजय
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