ईरान के हमले के बाद तेल, प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल; ब्रेंट क्रूड 116.38 डॉलर

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ईरान के हमले के बाद तेल, प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल; ब्रेंट क्रूड 116.38 डॉलर

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  • Publish Date - March 19, 2026 / 03:09 PM IST,
    Updated On - March 19, 2026 / 03:09 PM IST

बैंकॉक, 19 मार्च (एपी) ईरान के कतर में एक प्रमुख प्राकृतिक गैस सुविधा और दो तेल रिफाइनरी पर हमले के बाद वैश्विक बाजार में तेल एवं प्राकृतिक गैस की कीमतों में बृहस्पतिवार को तेज उछाल आया।

कतर की यह गैस सुविधा दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की गैस की आपूर्ति करती है।

इन हमलों से यह आशंका बढ़ गई है कि टैंकर यातायात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न ऊर्जा संकट अपेक्षा से अधिक लंबा एवं व्यापक हो सकता है जिससे तेल एवं गैस उत्पादन को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 116.38 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो युद्ध से पहले 73 डॉलर प्रति बैरल से कम थी।

प्राकृतिक गैस की कीमतों के यूरोपीय टीटीएफ मानक में बृहस्पतिवार को 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ईरान के हमले में कतर के रास लफान टर्मिनल को निशाना बनाया गया, जहां से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति की जाती है। कतर आम तौर पर वैश्विक एलएनजी खपत का करीब 20 प्रतिशत आपूर्ति करता है जिसे जहाजों के जरिये भेजा जाता है। ड्रोन हमले के बाद यह सुविधा बंद हो गई।

होर्मुज जलडमरूमध्य के अधिकतर टैंकर यातायात के लिए बंद होने से गैस की आपूर्ति के लिए कोई अन्य मार्ग नहीं बचा है।

ईरान द्वारा खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे पर किए गए हमलों से उत्पन्न व्यवधान यदि लंबे समय तक तेल और गैस की कीमतों को ऊंचा बनाए रखते हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की महंगाई के लिए एक बड़ा जोखिम साबित होगा।

अमेरिका के कच्चे तेल की कीमत बृहस्पतिवार सुबह 1.1 प्रतिशत बढ़कर 96.45 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी प्राकृतिक गैस के मानक हेनरी हब वायदा अनुबंध में 5.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

अपनी मौद्रिक नीति बयान में बैंक ऑफ जापान ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद वैश्विक वित्तीय और पूंजी बाजारों में अस्थिरता आई है और कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आगे के घटनाक्रम पर नजर रखने की जरूरत है।’’

तेल की ऊंची कीमतें जापान के लिए बड़ा बोझ हैं, जो दक्षिण कोरिया और ताइवान की तरह अपने उद्योगों के लिए कच्चे माल के अधिकतर हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है जिनमें तेल एवं उसके उत्पादों की बड़ी भूमिका है।

एपी निहारिका अजय

अजय