पश्मीना क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योजनाओं को मंजूरी

पश्मीना क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योजनाओं को मंजूरी

पश्मीना क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योजनाओं को मंजूरी
Modified Date: July 5, 2026 / 05:40 pm IST
Published Date: July 5, 2026 5:40 pm IST

लेह, पांच जुलाई (भाषा) उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख के पश्मीना क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए दो महत्वपूर्ण पहलों को मंजूरी दी है। इसके तहत चरवाहों को 25 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा और सहकारी समितियों के लिए आठ करोड़ रुपये का एक ‘रिवॉल्विंग फंड’ बनाया जाएगा। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

रिवॉल्विंग फंड एक ऐसा वित्तीय खाता या कोष होता है जो लगातार इस्तेमाल और फिर से भरता रहता है। जब कोष से पैसा खर्च या उधार दिया जाता है, तो मूलधन और ब्याज की वसूली होने पर वह पैसा वापस इसी कोष में जमा हो जाता है, जिससे यह भविष्य में अन्य परियोजनाओं या कर्ज के लिए फिर से उपलब्ध हो जाता है

सक्सेना ने नवगठित लद्दाख पश्मीना विकास बोर्ड (एलपीडीबी) की पहली बैठक में इन दोनों योजनाओं को मंजूरी दी। इनका उद्देश्य क्षेत्र के विश्वविख्यात पश्मीना उद्योग को मजबूत करना और चांगपा पशुपालक समुदायों की आजीविका में सुधार करना है।

अधिकारी के अनुसार, ये दोनों पहल टिकाऊ पशुधन विकास को बढ़ावा देने, पश्मीना बकरियों की संख्या बढ़ाने, सहकारी खरीद प्रणाली को सशक्त बनाने, पश्मीना की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार करने तथा पशुपालकों को आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर बिक्री से बचाने के लिए शुरू की गई हैं।

उन्होंने कहा कि इससे चांगथांगी पश्मीना बकरी पालन को युवा पीढ़ी के लिए अधिक लाभकारी और सम्मानजनक व्यवसाय के रूप में बढ़ावा मिलेगा, जिससे वे पारंपरिक पशुपालन को जारी रखने के लिए प्रेरित होंगे।

लद्दाख को चांगथांगी बकरी से प्राप्त दुनिया के सबसे बेहतरीन पश्मीना उत्पादन के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त है। हालांकि, हाल के वर्षों में पशुपालन की बढ़ती लागत, कठिन जलवायु परिस्थितियों और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण पशुपालकों की आय प्रभावित हुई है।

इन चुनौतियों को देखते हुए उपराज्यपाल ने ‘पशुधन विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम’ को मंजूरी दी है, जिसके तहत पात्र चांगपा पशुपालकों को सरकारी खरीद मूल्य के अतिरिक्त 25 प्रतिशत प्रोत्साहन सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खातों में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से दिया जाएगा।

भाषा योगेश रमण

रमण


लेखक के बारे में