डीजल में आइसोब्यूटेनॉल का मिश्रण अनिवार्य करने का प्रस्ताव साल के अंत तकः परिवहन सचिव

डीजल में आइसोब्यूटेनॉल का मिश्रण अनिवार्य करने का प्रस्ताव साल के अंत तकः परिवहन सचिव

डीजल में आइसोब्यूटेनॉल का मिश्रण अनिवार्य करने का प्रस्ताव साल के अंत तकः परिवहन सचिव
Modified Date: May 29, 2026 / 08:47 pm IST
Published Date: May 29, 2026 8:47 pm IST

नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) देश में ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और परिवहन क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने के लिए सरकार डीजल में आइसोब्यूटेनॉल का मिश्रण अनिवार्य करने का प्रस्ताव इस वर्ष के अंत तक ला सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने यहां उद्योग मंडल सीआईआई के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘डीजल में मिश्रण (ब्लेंडिंग) को गंभीरता से देखा जा रहा है। भारत पेट्रोलियम इस दिशा में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण पर शोध कर रही है, जिसके परिणाम काफी उत्साहजनक हैं।’

उन्होंने कहा कि डीजल की खपत पेट्रोल से लगभग दोगुनी होने की वजह से इस ईंधन में मिश्रण का प्रभाव देश की ऊर्जा सुरक्षा पर और भी अधिक होगा।

उमाशंकर ने कहा, ‘इस वर्ष के अंत तक डीजल में मिश्रण को अनिवार्य करने का प्रावधान लागू किए जाने की संभावना है।’

परिवहन सचिव ने कहा कि मंत्रालय पिछले 10-12 वर्षों में आगे बढ़ने वाले ईंधन मिश्रण कार्यक्रम को और आगे बढ़ा रहा है। इस क्रम में ई85 पेट्रोल (85 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल) और ई100 (लगभग शुद्ध एथेनॉल आधारित ईंधन) से जुड़े वाहन विनिर्माण नियमों का मसौदा भी जारी किया गया है।

उन्होंने बताया कि भारत पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर चुका है, जिससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने और उत्सर्जन घटाने में मदद मिली है।

उमाशंकर ने कहा, ‘ई20 स्तर पर ब्लेंडिंग को लेकर कुछ चिंताएं रही हैं, लेकिन यहां स्थिति अलग है क्योंकि ऐसे ईंधन के लिए वाहन अलग तरीके से बनाए जाएंगे। ई85 या ई100 ईंधन के लिए पेट्रोल पंपों पर अलग डिस्पेंसर भी लगाया जाएगा, जबकि सामान्य मिश्रित पेट्रोल एक ही डिस्पेंसर से उपलब्ध कराया जाता है।’

सचिव ने यह भी कहा कि मंत्रालय जल्द ही ट्रक और ट्रेलर को आपस में बदलकर उपयोग करने की सुविधा पर एक मसौदा अधिसूचना ला सकता है। इसका उद्देश्य ऐसा ढांचा विकसित करना है, जिससे इलेक्ट्रिक भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए बैटरी बदलने और बैटरी चार्जिंग की व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय का उद्देश्य लॉजिस्टिक व्यवस्था को अधिक कुशल बनाना है, ताकि वाहनों को चार्जिंग या बैटरी बदलने के लिए लंबे समय तक खड़ा न रहना पड़े।

इसके अलावा, मंत्रालय टोल संग्रह की ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (एमएलएफएफ) व्यवस्था को देशभर में लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा और टोल शुल्क इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अपने-आप कट जाएगा।

उमाशंकर ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है और इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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