सार्वजनिक उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना चाहिए: पीएमओ अधिकारी

सार्वजनिक उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना चाहिए: पीएमओ अधिकारी

सार्वजनिक उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना चाहिए: पीएमओ अधिकारी
Modified Date: February 6, 2026 / 08:11 pm IST
Published Date: February 6, 2026 8:11 pm IST

नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि भारत मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और रणनीतिक साझेदारियों के जरिये वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत कर रहा है, और ऐसे में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) को न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

मिश्रा ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि समय के साथ वैश्वीकरण, प्रौद्योगिकी में बदलाव और आर्थिक सुधारों ने वैश्विक एवं घरेलू आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बनाम निजी क्षेत्र के प्रभुत्व से जुड़ी बहस अब एक अधिक एकीकृत नजरिये में बदल गई है, जहां प्रतिस्पर्धात्मकता, दक्षता और नवाचार केंद्र में आ गए हैं।

उन्होंने कहा, ”इस बदलते संदर्भ में सीपीएसई से अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं, जिससे उन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का अनुसरण करते हुए अधिक फूर्ती के साथ काम करने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत एफटीए के जरिये वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ जुड़ रहा है, सीपीएसई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबले के लिए तैयार रहना होगा।

वह यहां ‘दक्ष’ कार्यक्रम (आकांक्षा, ज्ञान, उत्तराधिकार और सद्भाव का विकास) के दूसरे बैच के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। यह सीपीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक प्रमुख नेतृत्व विकास कार्यक्रम है।

मिश्रा ने कहा कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम खासकर अनिश्चितता के समय में आर्थिक वृद्धि में रणनीतिक भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने याद किया कि आजादी के बाद देश के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के आधार के निर्माण में सीपीएसई की मौलिक भूमिका रही है, जिसने आर्थिक वृद्धि, वित्तीय स्थिरता और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की नींव रखी।

उन्होंने 2021 की सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम नीति का भी उल्लेख किया, जिसने सीपीएसई को रणनीतिक और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया था।

मिश्रा ने कहा कि जहां निजी उद्यमों की भूमिका बढ़ रही है, वहीं ऊर्जा, रक्षा, बुनियादी ढांचे और वित्त जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम आवश्यक बने हुए हैं।

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम


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