बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसलों को नुकसान, आकलन के निर्देश

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसलों को नुकसान, आकलन के निर्देश

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसलों को नुकसान, आकलन के निर्देश
Modified Date: March 20, 2026 / 07:21 pm IST
Published Date: March 20, 2026 7:21 pm IST

नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकारों के साथ तालमेल कर फसलों को हुए नुकसान का सटीक आकलन करें। कई राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं सहित रबी की खड़ी फसलों को हुए नुकसान के बाद यह निर्देश दिया गया है।

देश की कृषि स्थिति की व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए चौहान ने कहा कि खराब मौसम ने ऐसे समय में कई राज्यों में फसलों को प्रभावित किया है। वह भी तब, जब फसलें पक चुकी थीं और कटाई के लिए तैयार थीं।

बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘न केवल बारिश हुई, बल्कि कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई। इसके परिणामस्वरूप फसलों को नुकसान पहुंचा।’’

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तत्काल राज्य सरकारों से संपर्क स्थापित करें, ताकि उन विशिष्ट स्थानों की पहचान की जा सके जहां ओलावृष्टि और अत्यधिक बारिश के कारण फसलों को नुकसान हुआ है। अक्सर ऐसी स्थिति में फसलें गिर जाती हैं।

हालांकि राज्य सरकारें अपने-अपने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के माध्यम से सहायता प्रदान करती हैं, लेकिन चौहान ने कहा कि उन्होंने फसल बीमा योजना की देखरेख करने वाले अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिया है कि वे राज्यों के साथ समन्वय करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फसल कटाई ठीक से किए जाएं और नुकसान की सीमा का सटीक आकलन हो सके।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि किसी किसान को नुकसान हुआ है, तो उस नुकसान का आकलन सटीक और वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि बीमा दावों का निपटारा प्रभावी ढंग से किया जा सके।’’

चौहान ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दो और ‘पश्चिमी विक्षोभ’ की चेतावनी जारी की है, और अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें तथा किसानों के लिए परामर्श जारी करें।

खरीद प्रक्रिया के संबंध में मंत्री ने कहा कि गेहूं और धान की सरकारी खरीद जल्द ही शुरू होगी। एक सरकारी बयान के अनुसार, उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि इस मौसम में रबी फसलों का उत्पादन असाधारण रूप से अधिक रहा है।

तुअर, मसूर और उड़द जैसी दलहन फसलों के बारे में उन्होंने कहा कि नाफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियां ​​किसानों द्वारा बेची जाने वाली पूरी फसल की खरीद करेंगी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बाजार मूल्य, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे न गिरें।

चौहान ने उत्पादन की ‘मात्रा’ के बजाय ‘गुणवत्ता’ पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश की ‘शरबती’ गेहूं जैसी प्रीमियम किस्मों का उदाहरण दिया, जिसके लिए बाजार में 400 रुपये से अधिक का अतिरिक्त मूल्य (प्रीमियम) मिलता है। उन्होंने ऐसी किस्मों को उच्च-मूल्य वाले अनाज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक आदर्श मॉडल बताया।

भाष राजेश राजेश रमण

रमण


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