आरबीआई ने अधिग्रहण वित्तपोषण दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन को तीन महीने के लिए टाला

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आरबीआई ने अधिग्रहण वित्तपोषण दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन को तीन महीने के लिए टाला

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 10:25 AM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 10:25 AM IST

मुंबई, 31 मार्च (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हितधारकों की प्रतिक्रिया के बाद अधिग्रहण वित्तपोषण संबंधी दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन को तीन महीने के लिए टालते हुए इसकी नई प्रभावी तिथि एक जुलाई 2026 तय की है।

केंद्रीय बैंक ने सोमवार को कहा कि उसने पूंजी बाजार जोखिम से संबंधित संशोधन निर्देशों के ढांचे में भी बदलाव किया है, जिसकी घोषणा पहली बार 13 फरवरी को की गई थी।

आरबीआई ने परामर्श प्रक्रिया के बाद ये दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनके तहत घरेलू ऋणदाताओं को अधिग्रहण के लिए वित्त उपलब्ध कराने की अनुमति दी गई थी।

केंद्रीय बैंक ने अपनी वेबसाइट पर जानकारी दी, ‘‘ हितधारकों के साथ आगे की चर्चा और समीक्षा के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि उक्त संशोधन निर्देशों की प्रभावी तिथि को तीन महीने बढ़ाकर एक जुलाई 2026 कर दिया जाए।’’

इन सोमवार को घोषित संशोधनों में अधिग्रहण वित्तपोषण की परिभाषा में बदलाव किया गया है, जिसमें अब विलय एवं समामेलन को भी शामिल किया गया है। साथ ही ऋण देने को केवल गैर-वित्तीय इकाई के अधिग्रहण तक सीमित किया गया है। अधिग्रहण करने वाली कंपनी को भारत या विदेश में स्थापित अपनी अनुषंगी कंपनी को लक्ष्य कंपनी के अधिग्रहण के लिए आगे ऋण देने हेतु अधिग्रहण वित्तपोषण लेने की अनुमति दी गई है।

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि अधिग्रहण वित्तपोषण का पुनर्वित्त केवल तभी किया जा सकेगा जब अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो जाए और अधिग्रहण करने वाली कंपनी द्वारा लक्ष्य कंपनी पर नियंत्रण स्थापित हो जाए। साथ ही यह पुनर्वित्त केवल अधिग्रहण वित्तपोषण के ऋण को चुकाने के लिए ही इस्तेमाल किया जाएगा।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि यदि अधिग्रहण वित्तपोषण अधिग्रहण करने वाली कंपनी की अनुषंगी इकाई या विशेष इकाई को दिया जाता है, तो अधिग्रहण करने वाली कंपनी की कॉरपोरेट गारंटी आवश्यक होगी।

आरबीआई ने कहा कि इन दिशानिर्देशों का एक उद्देश्य यह भी है कि शेयर, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट (इनविट) की इकाइयों के विरुद्ध लोगों को दिए जाने वाले ऋण की सीमा को युक्तिसंगत बनाया जाए तथा पूंजी बाजार मध्यस्थों को ऋण देने के लिए अधिक सिद्धांत-आधारित ढांचा स्थापित किया जाए।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा