आरबीआई की रिपोर्ट, नोटबंदी और जीएसटी ने की थी एमएसएमई सेक्टर की हालत खस्ता
आरबीआई की रिपोर्ट, नोटबंदी और जीएसटी ने की थी एमएसएमई सेक्टर की हालत खस्ता
नई दिल्ली। वर्ष 2016 के नवंबर में केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई सेक्टर) सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट से सामने आई है। नोटबंदी के बाद जीएसटी ने एमएसएमई सेक्टर को और बेहाल किया।
आरबीआई की मिनी स्ट्रीट मेमो रिपोर्ट में बताया गया कि लघु उद्योगों को वितरित कर्ज 2017 के निचले स्तर से सुधर कर 2015 मध्य के बढ़े स्तर पर पहुंच गया। हालांकि एमएसएमई क्षेत्र को बैंकों और एनबीएफसी द्वारा दिए गए कर्ज सहित सूक्ष्म ऋण में हाल की तिमाहियों में तेजी आई।
वहीं जीएसटी लागू किए जाने का असर भी इस सेक्टर पड़ा। रिपोर्ट में बताया गया कि इस दौरान हीरे व सोने-चांदी से आभूषण तैयार करने वाले ज्वैलरी सेक्टर में कर्मचारियों को सैलरी देने में ही मुश्किलें खड़ी हो गई थी। इस सेक्टर में बिना बिल के कारोबार होने की वजह से जीएसटीलागू हुआ तो व्यापार काफी मंदा हो गया। जीएसटी के चलते अनुपालन लागत और अन्य परिचालन लागत में भी बढ़ोतरी हो गई, क्योंकि 60% से ज्यादा छोटे उद्योग कर दायरे में आए। इनमें से 60% नई कर प्रणाली(जीएसटी) में समायोजित होने के लिये तैयार नहीं थे।
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इधर सिडबी की स्टडी में ये जानकारी आई कि नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद अधिकतर एमएसएमई के कर्ज में गिरावट आई लेकिन मार्च 2018 से इसमें सुधार दिखाई देने लगा है। इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन के अनुमान के मुताबिक, एमएसएमई में अधिक से अधिक पूंजी की संभावित मांग करीब 370 अरब डॉलर है जबकि अभी 139 अरब डॉलर की पूर्ति हो रही है। 230 अरब डॉलर का यह अंतर जीडीपी) का 11% है।
वेब डेस्क, IBC24

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