आरबीआई का रेपो दर को यथावत, तटस्थ रुख को बरकरार रखना संतुलित कदम : बैंक अधिकारी

आरबीआई का रेपो दर को यथावत, तटस्थ रुख को बरकरार रखना संतुलित कदम : बैंक अधिकारी

आरबीआई का रेपो दर को यथावत, तटस्थ रुख को बरकरार रखना संतुलित कदम : बैंक अधिकारी
Modified Date: February 6, 2026 / 04:35 pm IST
Published Date: February 6, 2026 4:35 pm IST

नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) उभरती वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के बीच केंद्रीय बैंक का रेपा दर को यथावत और तटस्थ रुख को बरकरार रखने का फैसला संतुलित कदम है। साथ ही लघु उद्योग को बढ़ावा देने, धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रस्ताव और शिकायत निवारण के लिए उपायों से ग्राहकों का भरोसा और सेवा गुणवत्ता में सुधार होगा। बैंक अधिकारियों ने शुक्रवार को यह कहा।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की छठी और अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में उम्मीद के मुताबिक नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।

इंडियन ओवरसीज बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर को यथावत रखने और तटस्थ रुख को बरकरार रखना बदलते वैश्विक और घरेलू हालात में एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। महंगाई के नियंत्रण में रहने से वृद्धि को समर्थन देने की पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत की वृद्धि के दृष्टिकोण में केंद्रीय बैंक का विश्वास घरेलू मांग की मजबूती और हाल के नीतिगत उपायों की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है। ग्राहक संरक्षण, बेहतर नकदी प्रबंधन और एमएसएमई को ऋण प्रवाह बढ़ाने के साथ-साथ वित्तीय बाजारों को गहरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक का वित्तीय परिवेश को मजबूत करने पर निरंतर जोर देना स्वागत योग्य है।’’

इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी बिनोद कुमार ने कहा, ‘‘आरबीआई का बैंकों में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने के लिए तरलता प्रबंधन पर जोर देना एक सकारात्मक कदम है और इससे ऋण प्रवाह को बनाए रखने में मदद मिलेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लघु एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने, वित्तीय समावेश, कर्ज वसूली और डिजिटल भुगतान की पहल से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, वहीं प्रस्तावित धोखाधड़ी नियंत्रण रूपरेखा…और बैंकिंग प्रणाली में शिकायत निवारण पर ध्यान केंद्रित करने से ग्राहकों का विश्वास और सेवा की गुणवत्ता बढ़ेगी।’’

आरबीएल बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री अनीता रंगन ने कहा, ‘‘उम्मीद के मुताबिक आरबीआई ने नीतिगत दर को यथावत रखा है…। मौद्रिक नीति समिति मुद्रास्फीति और जीडीपी के नए आंकड़ों का इंतजार करेगी और अप्रैल में संशोधित पूर्वानुमान जारी करेगी।’’

उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है और महंगाई चार से पांच प्रतिशत के दायरे में आने की संभावना है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं को लेकर जोखिम बना हुआ है, जिसको लेकर केंद्रीय बैंक सतर्क है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि रेपो दर में यथास्थिति उम्मीद के मुताबिक है और इसलिए बाजार पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

उन्होंने कहा, ‘‘आरबीआई ने नकदी आपूर्ति का भरोसा दिया है, लेकिन कदम आवश्यकता के अनुसार उठाए जाएंगे। साथ ही बजट के अनुरूप बिना गारंटी वाले एमएसएमई ऋण की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया जाना छोटे कारोबारियों के लिए राहत भरा कदम है।’’

श्रीराम फाइनेंस के कार्यकारी वाइस चेयरमैन उमेश रेवणकर ने कहा कि मजबूत घरेलू वृद्धि और बैंकों तथा एनबीएफसी दोनों से स्वस्थ ऋण विस्तार के बीच एमपीसी का फैसला उचित है।

रेवणकर के अनुसार, आरबीआई गवर्नर के बयान से पता चलता है कि इस वर्ष बैंक और गैर-बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्रों को ऋण प्रवाह 23.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर इस साल अबतक 29.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह बैंक ऋण के साथ-साथ बाजार-आधारित वित्त की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से जुड़े नियामकीय सुधार ऋण वितरण को आसान बनाएंगे और छोटे व्यवसायों तक वित्त की पहुंच बढ़ेगी।

भाषा

योगेश रमण

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