रियल एस्टेट ने की बुनियादी ढांचा व्यय बढ़ाने की सराहना, किफायती आवास की अनदेखी पर जताई चिंता
रियल एस्टेट ने की बुनियादी ढांचा व्यय बढ़ाने की सराहना, किफायती आवास की अनदेखी पर जताई चिंता
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) जमीन, मकान के विकास से जुड़ी कंपनियों ने आम बजट में किफायती आवास के लिए ठोस कदम नहीं उठाने को लेकर निराशा जतायी है। हालांकि बुनियादी ढांचा और पूंजीगत व्यय बढ़ाने की सराहना की।
देशभर के लगभग 15,000 रियल एस्टेट डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले क्रेडाई ने कहा कि नए घरों के निर्माण में किफायती आवास की हिस्सेदारी और कम हो सकती है।
हालांकि, क्रेडाई ने बजट में बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान को सकारात्मक बताया।
क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा, ‘बजट में किफायती आवास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जो हमारे लिए बहुत निराशाजनक है। वर्तमान पुराने मानक के कारण किफायती आवास का हिस्सा नए घरों के कुल निर्माण में 18 प्रतिशत से घटकर लगभग 12 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।’
उन्होंने कहा कि यह भारत के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के लिए गंभीर चेतावनी है। किफायती आवास कोई कल्याणकारी योजना नहीं है, यह आर्थिक बुनियादी ढांचा है और रोजगार, उपभोग और सामाजिक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण आधार है।
हालांकि निकाय ने कहा कि सरकार ने बुनियादी ढांचे पर निरंतर निवेश पर जोर दिया है।
क्रेडाई ने कहा कि सड़कों, मेट्रो, लॉजिस्टिक गलियारे, रेलवे और शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश से पहुंच बेहतर होगी, नए विकास क्षेत्रों के द्वार खुलेंगे और दीर्घकालिक शहरी विकास को समर्थन मिलेगा।
नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि बजट विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को दर्शाता है और यह आर्थिक विकास, उत्पादन और प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करना मझोले और छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) में रियल एस्टेट के विकास को बढ़ावा देगा और महानगरों से परे शहरीकरण को संतुलित करेगा।
गौड़ ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ ने कहा कि बजट में आधारभूत संरचना और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय पर जोर रियल एस्टेट में पिछले कुछ साल से आई तेजी को आगे बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि लगातार आधारभूत संरचना पर खर्च से कार्यालय, खुदरा और मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाओं को लाभ मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आवास की मांग मजबूत होगी।
गौड़ ने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश से शहरों का संतुलित और योजनागत विकास होगा और मेट्रो शहरों से बाहर नए रियल एस्टेट बाजार उभरेंगे।
सिग्नेचर ग्लोबल के संस्थापक एवं चेयरमैन ने कहा कि केंद्रीय बजट ने भारत के अगले विकास चरण के लिए एक भरोसेमंद मार्गदर्शन प्रदान किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्च-गति रेल मार्ग और नए राष्ट्रीय जलमार्ग से संपर्क व्यवस्था में सुधार होगा, जिससे माल और लोगों की आवाजाही तेज होगी। यह परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद करेगा और लॉजिस्टिक लागत घटाएगा। साथ ही कर सुधारों से आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे घर खरीदने की मांग में अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा।’’
उन्होंने बताया कि मझोले और छोटे शहरों में निवेश के निरंतर प्रयास से शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा और नए रियल एस्टेट बाजार उभरेंगे।
लोहिया वर्ल्डस्पेस के निदेशक पीयूष लोहिया ने कहा कि बजट आर्थिक विकास और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट और बुनियादी ढांचा जोखिम गारंटी कोष से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और छोटे शहरों में संगठित और संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
कृष्णा ग्रुप और क्रिसुमी कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष अशोक कपूर ने कहा, ‘बजट दीर्घकालीन आधारभूत संरचना आधारित विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। यह रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए आवश्यक है क्योंकि बेहतर आधारभूत संरचना और संपर्क व्यवस्था मांग को सीधे प्रभावित करती है।’
मिगसन ग्रुप के प्रबंध निदेशक यश मिगलानी का कहना है कि बजट में छोटे शहरों के विकास को लेकर मजबूत कदम उठाया गया है। यही शहर आगे चलकर शहरी और वाणिज्यिक वृद्धि को गति देंगे।
उन्होंने कहा कि बेहतर संपर्क, शहरी सुविधाएं और लॉजिस्टिक से ये बाजार संगठित वाणिज्यिक और मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाओं के लिए ज्यादा मजबूत बनेंगे।
भाषा योगेश रमण पाण्डेय
पाण्डेय

Facebook


