कई राज्यों के रेरा प्राधिकरण प्रकाशित नहीं कर रहे वार्षिक रिपोर्ट: एफपीसीई

कई राज्यों के रेरा प्राधिकरण प्रकाशित नहीं कर रहे वार्षिक रिपोर्ट: एफपीसीई

कई राज्यों के रेरा प्राधिकरण प्रकाशित नहीं कर रहे वार्षिक रिपोर्ट: एफपीसीई
Modified Date: February 13, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: February 13, 2026 10:36 pm IST

नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) घर खरीदारों के संगठन ‘फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स’ (एफपीसीई) ने शुक्रवार को कहा कि कई राज्यों के रियल एस्टेट नियामक नियमित रूप से वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करने के अपने वैधानिक दायित्व को पूरा नहीं कर रहे हैं।

एफपीसीई ने एक बयान में रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) की धारा 78 के उल्लंघन की तरफ इशारा किया।

संगठन ने कहा, ‘आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के स्पष्ट वैधानिक दायित्वों और बार-बार के निर्देशों के बावजूद देशभर में 75 प्रतिशत से अधिक राज्य रेरा प्राधिकरणों ने या तो कभी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है या उनका प्रकाशन बंद कर दिया है, या वे अद्यतन नहीं हैं।’

एफपीसीई ने मंत्रालय से सभी रेरा प्राधिकरणों को निर्धारित प्रारूप में वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए नए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।

संगठन ने मंत्रालय से आग्रह किया कि वह राज्य सरकारों को अधिनियम की धारा 82 और 83 के तहत शक्तियों का उपयोग करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहे।

एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा कि जब तक पुख्ता डेटा यह साबित न कर दे कि रेरा लागू होने के बाद घरों का कब्जा मिलने और कार्यप्रणाली की निष्पक्षता में बेहतरी आई है, तब तक सफलता के सभी दावे खोखले एवं बेबुनियाद हैं।

उन्होंने कहा, ‘निर्दोष घर खरीदारों के साथ छल किया जा रहा है और इस बार इसके लिए ‘रेरा’ का सहारा लिया जा रहा है। बिल्डरों के लिए यह कानून अब महज़ एक ऐसा ‘प्रमाण-पत्र’ बन गया है, जिसकी आड़ में वे बिना किसी जवाबदेही के अपनी परियोजनाएं बेच रहे हैं।’

एफपीसीई ने कहा कि कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गोवा ने रेरा के लागू होने के बाद से एक भी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है। वहीं, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे नौ राज्यों ने रिपोर्ट प्रकाशित करना शुरू किया था, लेकिन अब इसे बंद कर दिया है।

भाषा सुमित प्रेम

प्रेम


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