Bilaspur High Court Today News: नक्सल इलाके में तैनात पुलिसकर्मियों के ‘आउट ऑफ़ टर्न’ प्रमोशन पर हाईकोर्ट का फैसला.. सरकार को दिया दो महीने का वक़्त

Bilaspur High Court Today News: याचिकाकर्ताओं के अनुसार वे 15 और 16 अप्रैल 2024 को बीएसएफ के साथ संयुक्त रूप से चलाए गए बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन का हिस्सा थे। यह अभियान कांकेर जिले के कालपर-हापाटोला-छेटेबेठिया क्षेत्र में संचालित हुआ था, जहां 40-50 सशस्त्र माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई थी।

Bilaspur High Court Today News: नक्सल इलाके में तैनात पुलिसकर्मियों के ‘आउट ऑफ़ टर्न’ प्रमोशन पर हाईकोर्ट का फैसला.. सरकार को दिया दो महीने का वक़्त

Bilaspur High Court Today News || Image- IBC24 news File

Modified Date: February 10, 2026 / 11:59 pm IST
Published Date: February 10, 2026 11:59 pm IST
HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिए
  • आउट ऑफ टर्न प्रमोशन का मामला
  • एंटी नक्सल ऑपरेशन से जुड़ा आदेश

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हुए एक बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन में साहसिक भूमिका निभाने वाले पुलिस जवानों की आउट ऑफ टर्न प्रमोशन (असामान्य पदोन्नति) से जुड़े मामले में अहम आदेश जारी किया है। (Bilaspur High Court Today News) कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता जवानों के लंबित प्रतिनिधित्व पर कानून के अनुसार दो माह के भीतर निर्णय लिया जाए। याचिकाकर्ता दीपक कुमार नायक, अग्नु राम कोर्राम और संगीत भास्कर वर्तमान में कांकेर जिले में पदस्थ हैं।

ऑपरेशन में ढेर हुए थे 29 माओवादी

याचिकाकर्ताओं के अनुसार वे 15 और 16 अप्रैल 2024 को बीएसएफ के साथ संयुक्त रूप से चलाए गए बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन का हिस्सा थे। यह अभियान कांकेर जिले के कालपर-हापाटोला-छेटेबेठिया क्षेत्र में संचालित हुआ था, जहां 40-50 सशस्त्र माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई थी। इस कार्रवाई में 29 सशस्त्र नक्सली मारे गए थे, जिनमें 15 पुरुष और 14 महिलाएं शामिल थीं। साथ ही भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया था।

नहीं मिला प्रमोशन का फायदा

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इस सफल ऑपरेशन में कुल 187 पुलिसकर्मी शामिल थे, लेकिन शासन द्वारा केवल 54 जवानों को ही आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया। उनका कहना है कि वे भी समान परिस्थितियों में अभियान का हिस्सा थे, (Bilaspur High Court Today News) बावजूद इसके उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिला। इसी आधार पर उन्होंने 25 जून 2025 को पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज के समक्ष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया, जो अब तक लंबित है।

दो माह के भीतर ले फैसला

हाईकोर्ट ने माना कि मामला फिलहाल सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन है। ऐसे में अदालत ने सीधे पदोन्नति का आदेश देने के बजाय डीजीपी को निर्देश दिया कि वे पुलिस विनियम 70(क) के तहत निष्पक्ष और कानूनसम्मत निर्णय लें। कोर्ट ने दो माह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है और कहा है कि यदि याचिकाकर्ताओं का मामला उन 54 पदोन्नत जवानों के समान पाया जाता है, तो उनकी आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की प्रक्रिया भी शुरू की जाए।

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