जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए 2,000 करोड़ रुपये का कोष

जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए 2,000 करोड़ रुपये का कोष

जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए 2,000 करोड़ रुपये का कोष
Modified Date: February 13, 2026 / 10:19 pm IST
Published Date: February 13, 2026 10:19 pm IST

नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को ‘जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद – अनुसंधान, विकास एवं नवाचार’ (बाइरैक-आरडीआई) कोष की शुरुआत की।

इस कोष के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक) क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए पांच साल की अवधि में 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इस कोष का उद्देश्य प्रयोगशाला अनुसंधान और औद्योगिक विनिर्माण के बीच के अंतर को पाटना है। इसके तहत ‘टीआरएल-4’ से ‘टीआरएल-9’ तक की प्रौद्योगिकियों को इक्विटी, परिवर्तनीय उपकरणों और दीर्घकालिक ऋण के माध्यम से सहायता दी जाएगी।

पात्र स्टार्टअप, एसएमई और उद्योग भागीदार आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। पहले चरण के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2026 है।’

इस अवसर पर सिंह ने कहा कि यह कोष एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत जैव प्रौद्योगिकी में नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आगामी औद्योगिक क्रांति बायोटेक नवाचार, उन्नत विनिर्माण और नए जमाने की उद्यमिता पर आधारित होगी।

भाषा सुमित रमण

रमण


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