सेबी निवेश सलाहकारों के लिए हल्के दंड वाली मानकीकृत व्यवस्था बना रहाः चेयरमैन

सेबी निवेश सलाहकारों के लिए हल्के दंड वाली मानकीकृत व्यवस्था बना रहाः चेयरमैन

सेबी निवेश सलाहकारों के लिए हल्के दंड वाली मानकीकृत व्यवस्था बना रहाः चेयरमैन
Modified Date: March 16, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: March 16, 2026 4:54 pm IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि निवेश सलाहकार परिवेश को मजबूती देने के लिए मानकीकृत ‘लाइट-टच’ दंडात्मक व्यवस्था, डिजिटल नियामकीय मार्गदर्शन मंच और सभी मध्यस्थों के लिए साझा विज्ञापन संहिता जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

पांडेय ने यहां ‘पंजीकृत निवेश सलाहकार संघ’ के एक कार्यक्रम में कहा कि भारत में निवेश सलाहकार पारिस्थितिकी इस समय परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है।

उन्होंने कहा कि देश में फिलहाल करीब 1,000 पंजीकृत निवेश सलाहकार हैं जिनमें लगभग 470 व्यक्तिगत और 530 गैर-व्यक्तिगत संस्थाएं शामिल हैं।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख ने कहा कि नियामक एक मानकीकृत ‘लाइट-टच’ दंडात्मक ढांचा तैयार कर रहा है, जिसका उद्देश्य अनुपालन को बढ़ावा देना और पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। यह ढांचा अधिक कठोर न होकर हल्के दंड पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि सेबी निवेश सलाहकारों के लिए ‘सेबी सेतु’ नामक एक डिजिटल मंच भी विकसित कर रहा है, जो पंजीकरण से लेकर निरंतर अनुपालन तक के पूरे चक्र में सरल और समग्र नियामकीय मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

इसके अलावा नियामक सभी मध्यस्थों के लिए एकसमान विज्ञापन संहिता तैयार कर रहा है ताकि परिचालन संबंधी चुनौतियां कम हों और संचार में एकरूपता आए।

पांडेय ने कहा कि म्यूचुअल फंड वितरकों के मौजूदा नियामकीय ढांचे की समीक्षा के लिए एक कार्यसमूह भी गठित किया गया है, जो वितरकों और निवेश सलाहकारों के बीच संभावित ‘ओवरलैप’ की जांच करेगा।

हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि तेजी से बढ़ते निवेशक आधार के बावजूद 2021 के बाद से पंजीकृत निवेश सलाहकारों की संख्या में कमी आई है।

पांडेय ने कहा, “भारत में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और बाजार को अधिक विनियमित सलाहकारों की जरूरत है। अन्यथा इस खाली जगह को सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर जैसे गैर-विनियमित लोग भर देंगे जो अपनी राय को विशेषज्ञता और अटकलों को रणनीति के रूप में पेश करते हैं।”

उन्होंने कहा कि निवेशकों का ‘मुफ्त’ सलाह की तरफ झुकाव भी एक चुनौती है, क्योंकि भारत में पेशेवर वित्तीय सलाह के लिए भुगतान करने की संस्कृति अभी विकसित हो रही है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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