राज्य बड़े आकार के खेतों पर कर लगाकर वित्तीय स्थिति मजबूत कर सकते: मोंटेक सिंह अहलूवालिया
राज्य बड़े आकार के खेतों पर कर लगाकर वित्तीय स्थिति मजबूत कर सकते: मोंटेक सिंह अहलूवालिया
हैदराबाद, 27 फरवरी (भाषा) अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि राज्य सरकारें अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए उन बड़े खेतों पर कर लगा सकती हैं जो विविधीकरण से उच्च आय अर्जित कर रहे हैं।
यहां बुधवार को 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर आयोजित एक सम्मेलन में पूर्ववर्ती योजना आयोग के वाइस चेयरमैन रह चुके अहलूवालिया ने कहा कि राज्य विविधीकृत कृषि पर कराधान से प्राप्त राजस्व पूरी तरह अपने पास रख सकते हैं। इसे केंद्र के साथ साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘ वास्तविकता यह है कि संपूर्ण कृषि पर केंद्र कर नहीं लगा सकता और केवल राज्य ही कर लगा सकते हैं। क्या यह मान लिया जाए कि कृषि को हमेशा के लिए आयकर से मुक्त रखा जाना चाहिए, चाहे खेत का आकार कुछ भी हो? इसका बचाव करना बहुत कठिन है।’’
अहलूवालिया ने कहा, ‘‘ यदि आपके पास विविध तरह के मध्यम आकार के खेत हैं तो आप निश्चित तौर पर पर्याप्त उच्च आय उत्पन्न कर सकते हैं। आयकर की श्रेणी में आ सकते हैं। वह कर 100 प्रतिशत राज्यों को मिलेगा। उसे केंद्र द्वारा नहीं लिया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि संविधान में ऐसा कुछ नहीं है जो किसी राज्य सरकार को नीचे के स्तरों पर संसाधनों का हस्तांतरण करने से रोकता हो, यदि वह ऐसा करना चाहे। हालांकि प्राय: दबाव केंद्र सरकार की ओर निर्देशित किया जाता है।
अहलूवालिया ने कहा कि यदि किसी राज्य का मुख्यमंत्री वैश्विक मानकों को प्राप्त करने के लिए राजनीतिक निर्णय के रूप में सरकार के तीसरे स्तर यानी स्थानीय निकायों को धन हस्तांतरित और विकेंद्रीकृत करने का निर्णय लेता है, तो उसे केंद्र की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है।
अर्थशास्त्री ने यह भी कहा कि अधिकतर देशों में मानव पूंजी…जिसमें बाल स्वास्थ्य, मातृ स्वास्थ्य, शिक्षा और संबंधित क्षेत्र शामिल है…राष्ट्रीय स्तर की तुलना में सरकार के निचले स्तरों से अधिक जुड़ी हुई है।
उन्होंने साथ ही भारतीय राज्यों में मौजूद असमानताओं का जिक्र करते हुए कहा कि दक्षिणी राज्यों ने उल्लेखनीय रूप से कम प्रजनन दर से जनसंख्या वृद्धि में काफी कमी की है।
भाषा निहारिका रमण
रमण
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