रांची, 19 सितंबर (भाषा) झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शनिवार को केंद्र से खनिज वाली जमीन पर उपकर लगाने का राज्यों का अधिकार बहाल करने का आग्रह किया। एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन के बाद राज्य के इस अधिकार पर रोक लगा दी गई।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार किशोर ने नयी दिल्ली में ‘विकसित भारत की दिशा में भारत का वित्त पोषण’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में यह मांग रखी।
उन्होंने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से हुए नुकसान की भरपाई और विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) योजना में 90:10 के वित्त पोषण अनुपात को बहाल करने की भी मांग की।
किशोर ने कहा, ‘‘भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहायता देना जरूरी है। भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने का लक्ष्य केवल मजबूत अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समान अवसरों वाले और सशक्त समाज का निर्माण भी इसका आधार होना चाहिए।’’
मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम (एमएमडीआर एक्ट) में हाल में किए गए संशोधनों के तहत खनिज वाली जमीन पर नए कर या उपकर लगाने के लिए राज्य के अधिकारों पर रोक लगा दी गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे झारखंड को करीब 14,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है। इसके अलावा, एमएमडीआर अधिनियम में धारा 9(डी) जोड़े जाने से राज्य सरकार विभिन्न कोयला कंपनियों से बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये की राशि का दावा नहीं कर सकेगी।’’
किशोर ने आरोप लगाया कि पिछले छह वर्षों से झारखंड को केंद्र सरकार से मिलने वाली पर्याप्त वित्तीय सहायता से वंचित किया गया है।
उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि जाति और धर्म के आधार पर होने वाला विभाजन देश के समग्र विकास में बाधा डालता है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से 18-19 सितंबर को आयोजित सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, वित्त मंत्रियों, वित्त सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
भाषा यासिर पाण्डेय
पाण्डेय