सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा हुई समाप्त, रक्षा सहयोग पर चर्चा की

Ads

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा हुई समाप्त, रक्षा सहयोग पर चर्चा की

  •  
  • Publish Date - September 19, 2026 / 06:55 PM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 06:55 PM IST

मास्को, 19 सितंबर (भाषा) सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शुक्रवार को रूस की अपनी तीन दिवसीय सरकारी यात्रा पूरी की और इस दौरान वहां के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व के साथ बातचीत की एवं प्रमुख सैन्य संस्थानों का दौरा किया। भारतीय सैन्य अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि इस यात्रा ने भारत-रूस रक्षा सहयोग को नई गति दी तथा इस दौरान क्षमता विकास, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, तोपखाने के आधुनिकीकरण और परिचालन अनुभव साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

सेठ की यात्रा ऐसे समय में हुई है जब कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नयी दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता की।

दोनों नेताओं ने पिछले हफ़्ते हुई इस वार्ता में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में आपसी सहयोग की समीक्षा की।

मास्को में, सेठ ने रूसी फेडरेशन के रक्षा उप-मंत्री जनरल यूनुस-बेक येवकुरोव से बातचीत की।

अधिकारियों ने बताया कि रूसी थल सेना के मुख्यालय में सेठ ने मौजूदा सैन्य घटनाक्रमों पर विचारों का आदान प्रदान किया तथा दोनों सेनाओं के बीच सहयोग को और मज़बूत करने के उपायों पर चर्चा की, खासकर प्रशिक्षण, क्षमता विकास और पेशेवर अनुभव साझा करने के क्षेत्रों में।

अधिकारियों ने बताया कि सेठ को ऐतिहासिक ‘पीटर एंड पॉल’ किले में पारंपरिक तोप दागने का खास सम्मान भी दिया गया।

सेठ को औपचारिक ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ दिया गया और उन्होंने मॉस्को में अज्ञात सैनिक के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मास्को में अज्ञात सैनिक स्थल राष्ट्रीय युद्ध स्मारक है, जो दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मारे गये सोवियत सैनिकों के सम्मान में बनाया गया है।

भारत और रूस ने अपने रक्षा सहयोग का दायरा सिर्फ हथियारों की खरीद से आगे बढ़ाकर संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी सहयोग तक बढ़ाया है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना भी शामिल है।

दोनों देश नियमित रूप से सैन्य अभ्यास भी करते हैं, जिनमें ‘इंद्र’ शृंखला का अभ्यास शामिल है; यह 2003 से उनके द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का हिस्सा रहा है।

‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के आंकड़ों के अनुसार, 2021-2025 के दौरान भारत के हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत थी, जिससे वह इस अवधि में भारत को हथियार आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया।

भाषा

राजकुमार माधव

माधव