प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप क्षेत्र में मजबूती से एआई आर्थिक वृद्धि को दे सकती है गति: पीडब्ल्यूसी
प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप क्षेत्र में मजबूती से एआई आर्थिक वृद्धि को दे सकती है गति: पीडब्ल्यूसी
नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) भारत की प्रौद्योगिकी और सेवाओं में मजबूती और तेजी से बढ़ती स्टार्टअप कंपनियां कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग से देश को तेज वृद्धि हासिल करने में मदद कर सकती हैं। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पूंजीगत परियोजनाओं और बुनियादी ढांचा विकास मामलों के प्रमुख मोहम्मद अतहर ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि एआई भारत के लिए सबसे बड़ी बदलाव लाने वाली तकनीकों में से एक होगी। इसके लिए अनुसंधान और विकास में विशेष निवेश और सरकार या संस्थानों का सहयोग बेहद जरूरी होगा।
अतहर ने यह भी कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर एआई क्षेत्र में नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ से पहले भारतीय एआई स्टार्टअप के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया का भारत पर भरोसा इसकी सबसे बड़ी ताकत है और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भारतीय एआई मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी और डेटा सुरक्षा के नियमों पर आधारित हों।
भारत 15 से 20 फरवरी 2026 के बीच ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की मेजबानी करने जा रहा है। इस सम्मेलन में गूगल डीपमाइंड, एंथ्रोपिक, एडोब, सेल्सफोर्स, क्वालकॉम और फेडएक्स जैसी कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और कई देशों के प्रमुख राजधानी में एकत्रित होंगे। भारत उम्मीद कर रहा है कि इस बड़े आयोजन से एआई से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सभी पक्षों का साझा निर्णय निकले।
अतहर ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘भारत पहले से ही सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था, मजबूत तकनीकी व्यवस्था और तेजी से बढ़ती स्टार्टअप संस्कृति के कारण आगे है।’
उनके अनुसार, एआई अगले विकास के चरण के लिए एक मजबूत उत्प्रेरक बन सकता है।
अतहर ने कहा कि सरकार लगातार उद्यमिता और एआई को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। इसके लिए एआई मिशन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं और लोगों में इसके लाभ के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण है क्योंकि नई प्रौद्योगिकियों के उभरने पर अक्सर चिंता अवसरों पर हावी हो जाती है।’
पीडब्ल्यूसी के अधिकारी ने कहा कि सभी पक्षों को शामिल करके गोलमेज़ चर्चा, समितियों और सहयोगी मंचों के माध्यम से बातचीत करना ही सही परिणाम हासिल करने की कुंजी है।
रोजगार पर एआई के प्रभाव के बारे में उन्होंने कहा कि पहले सॉफ्टवेयर आने पर नौकरियों के छिनने की चिंता गलत साबित हुई। इसके बजाय सूचना प्रौधोगिकी ( आईटी) ने रोजगार और विकास दोनों को बढ़ावा दिया।
उन्होंने कहा, “जब सॉफ़्टवेयर क्रांति शुरू हुई, तब भी लोगों को नौकरी पर असर को लेकर चिंता थी। लेकिन सॉफ्टवेयर ने अंततः निर्माण उद्योग को सक्षम किया और पिछले दो दशकों में भारत की वृद्धि को बढ़ाया, जिससे लाखों नौकरियां सृजित हुईं।”
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार एआई में भारत की प्रगति को और भी तेज करने की क्षमता है।
भाषा योगेश रमण
रमण

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