भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत घरेलू निजी निवेश जरूरी: राजन
भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत घरेलू निजी निवेश जरूरी: राजन
(बिजय कुमार सिंह)
नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि जब तक भारत में घरेलू निजी निवेश नहीं बढ़ेगा, तब तक देश अपेक्षा के मुताबिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित नहीं कर पाएगा।
राजन ने कहा कि भारत में कंपनियों के निवेश में सतत रूप से वृद्धि नहीं हो रही है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें यह अजीब नहीं लगता कि जिस देश में आर्थिक वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत (वित्त वर्ष 2025-26) है, जो दुनिया में किसी भी देश के मुकाबले सबसे अधिक है, वहां से पूंजी बाहर जा रही है, राजन ने कहा, ‘‘अगर आपका निजी क्षेत्र भी निवेश कर रहा होता, तो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आता, लेकिन आपका निजी क्षेत्र निवेश नहीं कर रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, यहां कुछ कमी है और हो सकता है, जैसा कि कुछ लोगों ने तर्क दिया है, यह नीतिगत अनिश्चितता के कारण हो।’’
राजन ने यह भी कहा कि इन समस्याओं का समाधान संभव है और सरकार मजबूत वृद्धि दर हासिल करने के लिए आर्थिक सुधारों में रुचि दिखा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि एक बार जब हम घरेलू निवेश, यानी अपनी कंपनियों के निवेश को ठीक कर लेंगे, तो हम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को भी ठीक कर सकते हैं।’’
राजन ने कहा कि तमिलनाडु जैसे कुछ राज्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित कर रहे हैं। इसके साथ उन्होंने कहा कि यह जानना जरूरी है कि विदेशी पूंजी भारत से बाहर क्यों जा रही है।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि दूसरा कारण अमेरिका-भारत संबंधों में अनिश्चितता है। अगर 50 प्रतिशत शुल्क का यह दबाव हट जाता है, तो हम वास्तव में अधिक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भाग ले सकेंगे और यह भारत के लिए बहुत फायदेमंद होगा।’’
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, नवंबर, 2025 में भारत के शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में लगातार चौथे महीने कमी आई। इस माह के दौरान पूंजी निकासी, पूंजी प्रवाह के मुकाबले 44.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर अधिक थी।
वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर राजन ने कहा कि भारत में पर्याप्त पोर्टफोलियो निवेश है और पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजार में काफी मजबूती आई है।
उन्होंने कहा, ‘‘शायद चीन के फिर से उभरने के साथ, पोर्टफोलियो निवेशक अपने निवेश में बदलाव कर रहे हैं और इसका कुछ असर भारत में पोर्टफोलियो निवेश पर भी पड़ेगा।’’
यह पूछे जाने पर कि भारत की अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की होल्डिंग पांच साल के निचले स्तर पर क्यों आ गई है, राजन ने कहा कि कई देश अपने भंडार में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि डॉलर अभी भी प्रमुख आरक्षित मुद्रा बना हुआ है क्योंकि इसका दुनिया भर के अत्यधिक नकदी बाजारों में आसानी से कारोबार किया जा सकता है और अभी भी इस बात का काफी भरोसा है कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में कानून का शासन कायम रहेगा।
राजन ने कहा, ‘‘लेकिन तमाम अनिश्चितताओं और अमेरिकी प्रशासन की कुछ नियमों को तोड़ने की प्रवृत्ति को देखते हुए, मुझे लगता है कि समय के साथ विश्वास कमजोर होता जा रहा है।’’
जाने-माने अर्थशास्त्री ने यह भी कहा कि कई केंद्रीय बैंक सोने में निवेश कर रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ तिमाहियों में सोने की कीमत में भारी उछाल आया है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या इस समय सोने में तेजी का बुलबुला बन रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘बेशक, हमें बाद में ही पता चलेगा, लेकिन संक्षेप में मैं आपको बता रहा हूं कि अपने भंडार को फिर से कहां निवेश किया जाए, इसका कोई आसान जवाब नहीं है। हमें नए स्रोतों की तलाश करनी चाहिए। हमने ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर या अन्य देशों में उतना निवेश नहीं किया।’’
उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में भी भारत के पास डॉलर बॉन्ड में काफी भंडार रहेगा।
अमेरिका के भारत पर लगाए गए उच्च शुल्क से जुड़े एक सवाल के जवाब राजन ने कहा कि उन्हें यह समझना मुश्किल लगता है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक मित्रता के परिणामस्वरूप इस प्रकार के शुल्क क्यों लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शुल्क हर चीज पर लागू नहीं है, उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात, दवा निर्यात। लेकिन हमारे कुछ प्रमुख श्रम-प्रधान उद्योग, जैसे कपड़ा और आभूषण, प्रभावित हो रहे हैं और यह स्थिति जितनी लंबी चलेगी, इन उद्योगों को दीर्घकालिक नुकसान होगा।
राजन ने कहा, ‘‘इसलिए, मैं पूरी तरह सहमत हूं कि यह किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं लगता है और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि इसे समाप्त किया जाए।’’
भाषा रमण अजय
अजय

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