एफएंडओ में एसटीटी बढ़ोतरी का मकसद सट्टेबाजी को रोकना, छोटे निवेशकों की रक्षा करना: सीतारमण

एफएंडओ में एसटीटी बढ़ोतरी का मकसद सट्टेबाजी को रोकना, छोटे निवेशकों की रक्षा करना: सीतारमण

एफएंडओ में एसटीटी बढ़ोतरी का मकसद सट्टेबाजी को रोकना, छोटे निवेशकों की रक्षा करना: सीतारमण
Modified Date: February 1, 2026 / 05:45 pm IST
Published Date: February 1, 2026 5:45 pm IST

नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने का मकसद उच्च जोखिम वाली सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन भोले-भाले निवेशकों को हतोत्साहित करने के लिए किया गया, जो डेरिवेटिव बाजार में बड़ी मात्रा में पैसा गंवा रहे थे।

बजट में वायदा अनुबंधों पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा, विकल्प सौदों पर एसटीटी को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। अभी तक एसटीटी विकल्प प्रीमियम पर 0.1 प्रतिशत और विकल्प कारोबार पर 0.125 प्रतिशत था।

बजट के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में सीतारमण ने कहा कि सरकार वायदा-विकल्प कारोबार के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह चाहती है कि भारी नुकसान का सामना कर रहे छोटे निवेशक सट्टेबाजी वाले एफएंडओ बाजार से दूर रहें।

सीतारमण ने कहा, ”यह मामूली वृद्धि पूरी तरह से सट्टेबाजी को लक्षित है। हम इसके (एफएंडओ कारोबार) खिलाफ नहीं हैं, लेकिन छोटे निवेशकों को नुकसान हो रहा है, तो हम चुप कैसे रह सकते हैं। इसलिए, एफएंडओ पर एसटीटी में यह वृद्धि ऐसे निवेश को रोकने के लिए है।”

सेबी के अध्ययनों के अनुसार, एफएंडओ खंड में 90 प्रतिशत से अधिक खुदरा निवेशकों को नुकसान होता है। बाजार नियामक ने इस खंड में कारोबार कम करने के लिए पहले भी कम कदम उठाए हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अत्यधिक सट्टेबाजी की गतिविधियों को हतोत्साहित करने और अधिक संतुलित बाजार संरचना को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कुछ लोगों ने चेतावनी दी है कि यह निकट अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भागीदारी को प्रभावित कर सकता है।

इससे पहले राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि एफएंडओ खंड में एसटीटी बढ़ाने का मकसद सट्टेबाजी की प्रवृत्तियों को हतोत्साहित करना और प्रणालीगत जोखिम को संभालना है।

श्रीवास्तव ने कहा कि एफएंडओ में सट्टेबाजी के कारण छोटे और खुदरा निवेशकों को नुकसान हो रहा था। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का इरादा सट्टेबाजी की प्रवृत्तियों को हतोत्साहित करना है, और यही वजह है कि दर में वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से वायदा-विकल्प बाजारों में प्रणालीगत जोखिम को संभालने के लिए है।

श्रीवास्तव ने कहा कि इस वृद्धि के बाद भी एसटीटी की दरें होने वाले लेनदेन की मात्रा की तुलना में मामूली रहेंगी।

सीतारमण ने कहा कि 2026-27 के लिए घोषित 12.22 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत है और अब तक का सर्वाधिक है।

वित्त वर्ष 2026-27 का पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2025-26 में घोषित 11.11 लाख करोड़ रुपये के बजटीय पूंजीगत व्यय से 10 प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने घोषणा की है कि 12.22 लाख करोड़ रुपये का सार्वजनिक व्यय किया जाएगा। इस बार यह जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है। यह कम से कम पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है और यदि आप पिछली अवधि के आंकड़ों को भी देखें तो यह संभवत: सबसे अधिक है।’’

वित्त वर्ष 2021-22 में पूंजीगत व्यय जीडीपी का 2.5 प्रतिशत और 2024-25 में लगभग 4.0 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2015-16 में सरकार का पूंजीगत व्यय 2.35 लाख करोड़ रुपये था।

सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य ‘यथार्थवादी’ है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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