जेपी एसोसिएट्स के लिए सफल बोलीदाता की चयन प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष थीः एनसीएलएटी में सीओसी
जेपी एसोसिएट्स के लिए सफल बोलीदाता की चयन प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष थीः एनसीएलएटी में सीओसी
नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण से जुड़े मामले में ऋणदाताओं ने सोमवार को एनसीएलएटी से कहा कि सफल बोलीदाता के चयन की प्रक्रिया ‘निष्पक्ष’ और ‘पारदर्शी’ ढंग से अंजाम दी गई और किसी भी प्रतिभागी को फायदा पहुंचाने के लिए नियम नहीं बनाए गए।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बोली और मूल्यांकन स्वीकृत ढांचे के अनुरूप किए गए।
मेहता ने कहा कि जहां वेदांता लिमिटेड को शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) के आधार पर सबसे अधिक अंक मिले, वहीं कुल मूल्यांकन में अदाणी एंटरप्राइजेज शीर्ष पर रही।
ऋणदाताओं की समिति ने वेदांता के संशोधित बोली प्रस्ताव को खारिज करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इसे स्वीकार करने पर समूची बोली प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ती जिससे कर्ज समाधान में विलंब आता।
मेहता ने कहा, “बोली स्वीकार करने से जुड़ी निर्णय प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है और यह वाणिज्यिक समझदारी पर आधारित है, जिस पर अपीलीय समीक्षा सीमित है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कोई प्रतिभागी सिर्फ यह कहकर प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकता कि वह अधिक राशि देने को तैयार है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बाद में प्रस्ताव बढ़ाने से दिवालिया प्रक्रिया की पवित्रता प्रभावित होती है।
वेदांता ने एनसीएलएटी के समक्ष दायर अपनी याचिकाओं में कहा है कि उसका संशोधित प्रस्ताव अदाणी एंटरप्राइजेज के मुकाबले सकल मूल्य के आधार पर करीब 3,400 करोड़ रुपये और एनपीवी के आधार पर लगभग 500 करोड़ रुपये अधिक है।
मेहता ने बताया कि वेदांता ने आठ नवंबर, 2025 को अपना संशोधित बोली प्रस्ताव दाखिल किया था जबकि चुनौती प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। कंपनी ने अपने प्रस्ताव में 180 दिन के भीतर 400 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश का प्रस्ताव दिया था, जिसे संशोधित कर 800 करोड़ रुपये कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि दिवाला समाधान पेशेवर (आरपी) और उसके कानूनी सलाहकारों ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर संशोधित बोली दाखिल करना प्रक्रियागत नियमों का उल्लंघन है। इंडिया डेब्ट रिजॉल्यूशन कंपनी लिमिटेड ने भी इस पर कानूनी राय मांगी थी और सीओसी के अन्य सदस्यों ने इसे सभी आवेदकों के लिए समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ बताया।
वरिष्ठ अधिवक्ता निरंजन रेड्डी ने कहा कि मूल्यांकन ‘मैट्रिक्स’ पहले से ही समाधान योजना के आवेदन (आरएफआरपी) में स्पष्ट था और बोलीदाताओं को प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख था कि अंतिम वित्तीय प्रस्ताव में कोई बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सीओसी की तरफ से दलीलें पूरी हो जाने के बाद न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली एनसीएलएटी की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी। अदाणी एंटरप्राइजेज की तरफ से मंगलवार को पक्ष रखा जाएगा।
वेदांता लिमिटेड ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की इलाहाबाद पीठ के 17 मार्च के उस आदेश को चुनौती देते हुए दो याचिकाएं दायर की हैं, जिसमें जेएएल के अधिग्रहण के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज की तरफ से लगाई गई 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दे दी थी।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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