केजी बेसिन मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज की अपील पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई शुरू
केजी बेसिन मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज की अपील पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई शुरू
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और उसकी साझेदार कंपनियों की उन अपीलों पर मंगलवार को अंतिम सुनवाई शुरू की, जिनमें कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन गैस विवाद में आए मध्यस्थता निर्णय को निरस्त करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।
आरआईएल के साथ बीपी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड और निको (एनईसीओ) लिमिटेड ने उच्च न्यायालय के 14 फरवरी, 2025 के आदेश को चुनौती दी हुई है। इससे पहले उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 2023 में इन कंपनियों के पक्ष में मध्यस्थता निर्णय को बरकरार रखा था।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल हैं।
आरआईएल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने केंद्र के इस आरोप को खारिज किया कि कंपनी ने सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी के ब्लॉकों से गैस ‘निकाली’ थी।
उन्होंने कहा कि गैस का प्रवाह दबाव के अंतर के कारण होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसकी तुलना जैविक प्रक्रिया ‘ऑस्मोसिस’ (परासरण) के साथ की जा सकती है।
सिंघवी ने कहा कि गैस की कथित ‘चोरी’ का आरोप तकनीकी और कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार ने परियोजना में कोई पूंजी निवेश या अन्वेषण जोखिम नहीं उठाया, लेकिन गैस से मिलने वाले रॉयल्टी और लाभांश की अंतिम लाभार्थी वही है।
उन्होंने कहा कि आरआईएल ने गहरे समुद्र वाली इस परियोजना पर 7.4 अरब डॉलर का निवेश किया है और यह घरेलू गैस उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
इससे पहले, 2018 में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने केंद्र के 1.55 अरब डॉलर के दावे को खारिज करते हुए संबंधित कंपनियों को 83 लाख डॉलर का मुआवजा देने का फैसला सुनाया था।
हालांकि, बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने केंद्र की अपील स्वीकार करते हुए इस निर्णय को निरस्त कर दिया।
शीर्ष अदालत इस मामले पर आगे की सुनवाई बुधवार को करेगी।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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