बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ताजपुर बंदरगाह परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद

बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ताजपुर बंदरगाह परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद

बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ताजपुर बंदरगाह परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद
Modified Date: May 6, 2026 / 03:43 pm IST
Published Date: May 6, 2026 3:43 pm IST

(बिशेश्वर मालाकार)

कोलकाता, छह मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद 25,000 करोड़ रुपये की ताजपुर बंदरगाह परियोजना को लेकर उद्योग की उम्मीदें एक बार फिर जग गई है। यह परियोजना लंबे समय से अटकी हुई है।

उद्योग को उम्मीद है कि राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय से प्रस्तावित बुनियादी ढांचा उद्यम का काम तेजी से आगे बढ़ेगा।

हालांकि, दिसंबर, 2025 में पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआईडीसी) द्वारा जारी नई वैश्विक निविदा अब रद्द हो गई है क्योंकि इसमें कंपनियों की ओर से पर्याप्त भागीदारी देखने को नहीं मिली थी।

नेशनल शिपिंग एंड लॉजिस्टिक्स कमेटी, बीसीसीएंड आई के चेयरमैन, अदीप नाथ पाल चौधरी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘बंगाल में केंद्र-राज्य के तालमेल से, परियोजना के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। हालांकि, इसका पूरा लाभ अंतिम छोर तक संपर्क और सुगम मल्टीमॉडल एकीकरण पर निर्भर करेगा।’’

चौधरी बामर लॉरी एंड कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक भी हैं। उन्होंने कहा कि ताजपुर बंदरगाह पूर्वी भारत के व्यापार के लिए एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है। इससे बड़े जहाज सीधे लंगर डाल सकेंगे, पारगमन केंद्र पर निर्भरता कम होगी और लॉजिस्टिक की लागत कम होगी। साथ ही, कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह पर भीड़भाड़ कम होगी जिससे जहाजों के आने-जाने का समय कम हो सकेगा।

समुद्री बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि ताजपुर में एक नए बंदरगाह के डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, उसे चलाने और स्थानांतरित करने की निविदा को दो सप्ताह पहले ही रद्द कर दिया गया है, क्योंकि इसके लिए न्यूनतम बोलियां प्राप्त नहीं हुई थीं।

भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में ताजपुर बंदरगाह और कुल्पी बंदरगाह के विकास का वादा किया है। ये परियोजनाएं राज्य में औद्योगिकीकरण, लॉजिस्टिक और रोजगार को बढ़ावा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

पूर्वी मिदनापुर जिले में ताजपुर बंदरगाह परियोजना का विचार करीब एक दशक पहले बना था। शुरू में, इस परियोजना को कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह, कोलकाता) के साथ भागीदारी में शुरू किया गया था। बाद में, राज्य सरकार ने बंदरगाह को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) में विकसित करने का फैसला किया था।

वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल सरकार ने बंदरगाह परियोजना के लिए डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, परिचालन और स्थानांतरण (डीबीएफओटी) के आधार पर बोलियां मांगीं। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकानमिक जोन (एपीएसईजेड) इसमें सज्जन जिंदल के जेएसडब्ल्यू समूह की कंपनी जेएसडब्ल्यू इन्फ्रास्ट्रक्चर को पछाड़ कर शीर्ष बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी थी।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अक्टूबर, 2022 में एपीएसईजेड को आशय पत्र (एलओआई) भी सौंप दिया था। उस समय इस परियोजना में लगभग 25,000 करोड़ रुपये का निवेश आने की बात कही गई थी।

हालांकि, नवंबर 2023 में, राज्य सरकार ने बिना कोई कारण बताए नई निविदा प्रक्रिया शुरू की। जून 2025 में, बंगाल मंत्रिमंडल ने अदाणी समूह के साथ पूर्व में हुई व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया और नई निविदा प्रक्रिया को मंजूरी दी।

भाषा अजय अजय रमण

रमण


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