प्रौद्योगिकी एक सशक्त माध्यम,भविष्य की सफलता ‘‘भरोसे’’ पर टिकी होगी’:एआई पर नैसकॉम उपाध्यक्ष

प्रौद्योगिकी एक सशक्त माध्यम,भविष्य की सफलता ‘‘भरोसे’’ पर टिकी होगी’:एआई पर नैसकॉम उपाध्यक्ष

प्रौद्योगिकी एक सशक्त माध्यम,भविष्य की सफलता ‘‘भरोसे’’ पर टिकी होगी’:एआई पर नैसकॉम उपाध्यक्ष
Modified Date: January 22, 2026 / 12:17 pm IST
Published Date: January 22, 2026 12:17 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) नैसकॉम के सार्वजनिक नीति उपाध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने कहा कि भारत अपनी बड़ी एवं विविध आबादी को देखते हुए ’डीपफेक’, डिजिटल धोखाधड़ी और उपयोगकर्ताओं को पेश होने वाली अन्य समस्याओं से निपटने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) के कामकाज को लेकर एक संतुलित एवं चरणबद्ध दृष्टिकोण अपना रहा है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी उद्योग की भविष्य की सफलता की नींव, भरोसे पर ही टिकी होगी।

प्रौद्योगिकी को एक बड़ा सशक्त माध्यम बताते हुए अग्रवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा कि एआई का उपयोग इसके कारण उत्पन्न होने वाली कई तरह की समस्याओं को कम करने और रोकने के लिए भी किया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि उपयोगकर्ताओं को नुकसान के बाद प्रतिक्रिया देने वाले विनियमन के बजाय अब ‘प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा सीमाएं’ (टेक्नोलॉजी-लेड गार्डरेल्स) तय करने पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम 1.4 अरब से अधिक आबादी वाला देश हैं और हमारी जनसंख्या बेहद विविध एवं विषम है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि नागरिकों को कोई नुकसान न पहुंचे। चाहे वह ‘डीपफेक’ हों या अन्य समस्याएं जो लगातार तेजी से बढ़ रही हैं, खासतौर पर वित्तीय धोखाधड़ी एवं डिजिटल गिरफ्तारी जैसे मामले…। इसलिए इन सभी मुद्दों का प्रभावी ढंग से समाधान करना बेहद जरूरी है। उद्योग के नजरिये से भी यह बेहद अहम है क्योंकि भविष्य की किसी भी सफलता का आधार मजबूत भरोसा ही होगा।’’

अग्रवाल ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रस्तावित एआई ढांचे एवं भारतीय रिजर्व बैंक के एआई अपनाने को बढ़ावा देने के समग्र दृष्टिकोण संबंधी रिपोर्ट सहित हालिया घटनाक्रमों का उल्लेख किया और एआई के कामकाज को लेकर सरकार के ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’ (होल-ऑफ-गवर्नमेंट अप्रोच) की सराहना की।

उन्होंने कहा, ‘‘ सरकार इस दिशा में काम कर रही है और व्यापक परामर्श हो रहा है। एक बुनियादी बदलाव यह है कि समस्याओं के पीछे भागने वाले नियम बनाने के बजाय अब ऐसे ढांचे विकसित हो रहे हैं जिनमें प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा सीमाएं तय की जा सकती हैं। ’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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