कठिन व्यापार वार्ताओं से समकक्षों के बीच नजदीकी बढ़ी, कुछ अब परिवार की तरह: पीयूष गोयल
कठिन व्यापार वार्ताओं से समकक्षों के बीच नजदीकी बढ़ी, कुछ अब परिवार की तरह: पीयूष गोयल
(विजय जोशी)
नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं को नया आकार देने वाली ‘कठिन और कड़वी’ व्यापार वार्ताओं के बाद, उन रणनीतिकारों और मंत्रियों का रिश्ता कैसा होता है जो घंटों एक-दूसरे से मेज पर जूझते हैं? वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की मानें तो, सौदेबाजी की इस तीखी खींचतान ने उन्हें और उनके विदेशी समकक्षों को एक-दूसरे के इतना करीब ला दिया है कि वे अब ‘एक परिवार की तरह’ हो गए हैं।
रविवार को ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में गोयल ने इन रिश्तों की गहराई साझा करते हुए कहा ‘मैंने (दूसरी तरफ के) हर वार्ताकार से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की है। वास्तव में, हमने एक बहुत ही मजबूत साझेदारी और रिश्ता बनाया है।’
हाल के महीनों में गोयल ने आठ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को अंतिम रूप दिया है, जिनमें मुख्य रूप से ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू) और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुई वार्ताएं शामिल हैं। इसके साथ ही सबसे चर्चित वह समझौता रहा, जिसकी घोषणा शनिवार को की गई, जिसमें अमेरिका ने आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।
वार्ताओं के पीछे की अंदरूनी हलचल और रणनीति के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने इसे ‘रोमांचक’ बताया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इसमें मजा आता है। व्यापार वार्ताएं दरअसल आपकी पैनी समझ और भविष्य को भांपने की कला के बारे में हैं। इसमें चीजों को हर नजरिए से देखना पड़ता है, ताकि आप किसी एक बिंदु पर न अटकें और उसके बहुआयामी परिणामों को गहराई से समझ सकें।’
उन्होंने कहा, ‘व्यापार वार्ताएं बहुत दिलचस्प होती हैं। यह सब आपकी तीक्ष्ण बुद्धि, भविष्य को भांप लेने की कला और चीजों को व्यापक नजरिए से देखने के बारे में है, ताकि आप किसी एक बिंदु पर अटक न जाएं।’
उन्होंने कहा कि व्यापार वार्ताओं में सारा खेल खुद पर संयम रखने का है। हालांकि, कभी-कभी मेज पर अपना ‘वजन’ पैदा करने के लिए रणनीति के तौर पर अपना आपा खोना (गुस्सा दिखाना) भी पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की समझौते करने की अपनी एक अलग और गरिमापूर्ण शैली है। गोयल के अनुसार, ‘हमारा तरीका दूसरे देश की संवेदनशीलताओं का सम्मान करने का रहा है, क्योंकि हम भी यही उम्मीद करते हैं कि वे हमारी संवेदनशीलताओं का उतना ही सम्मान करें।’
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिकी वार्ताकारों ने भारत की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया, तो गोयल ने इसे सीधे रिश्तों की मजबूती से जोड़ दिया। उन्होंने साझा किया कि अमेरिका सहित सभी नौ व्यापार वार्ताओं के दौरान उनके अनुभव बेहद निजी और सकारात्मक रहे।
गोयल ने कहा, ‘एक व्यक्तिगत टिप्पणी के तौर पर मैं कहूंगा कि मैंने अपने समकक्षों के साथ बहुत अच्छे संबंध बनाए हैं। चाहे कोई भी देश हो, अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) से लेकर वहां के अन्य मंत्रियों और अधिकारियों तक के साथ मेरे रिश्ते अब इतने गहरे हो गए हैं कि मैं कह सकता हूं कि वे अब ‘परिवार के सदस्यों’ की तरह हैं।’
रिश्तों की इसी गर्माहट का एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए गोयल ने कहा, ‘आज स्थिति यह है कि हम इनमें से किसी को भी, किसी भी समय फोन मिला सकते हैं। एक समय था जब मैंने (एक समकक्ष को) मैसेज भेजकर पूछा ‘क्या आप फ्री हैं, क्या मैं फोन कर सकता हूं?’ और उधर से जवाब आया: ‘बिना हिचकिचाहट 24 घंटे में कभी भी फोन करिए, मुझे मैसेज करने की जहमत भी मत उठाइए।’ हमने एक-दूसरे के साथ ऐसा तालमेल बना लिया है।’
हालांकि, गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि इस व्यक्तिगत निकटता का मतलब समझौतों में ढील देना नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, ‘अंततः, यह अपने देश के हितों की रक्षा करने और अपने राष्ट्र के लिए अधिकतम लाभ खोजने के बारे में है। हमें इस बात का सम्मान करना चाहिए।’
गोयल ने व्यापार वार्ताओं की जिम्मेदारी और गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, ‘हमें इस तथ्य का भी सम्मान करना चाहिए कि यह एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम है। हम एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में जो भी निर्णय लेते हैं, वह आने वाले कई दशकों तक हमारे देश और राष्ट्र को प्रभावित करने वाला होता है। इसलिए, एक वार्ताकार को बेहद सतर्क और पैनी सोच वाला होना चाहिए। साथ ही, दूसरे पक्ष के साथ बेहतर तालमेल बनाना भी जरूरी है, क्योंकि अक्सर यही व्यक्तिगत तालमेल आपको देश के लिए कुछ अतिरिक्त लाभ दिलाने में मददगार साबित होता है।’
भाषा सुमित पाण्डेय
पाण्डेय

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