आंतरिक वित्तीय नियंत्रण को अनुपालन नहीं, कारोबारी आवश्यकता मानें: आईसीएआई

आंतरिक वित्तीय नियंत्रण को अनुपालन नहीं, कारोबारी आवश्यकता मानें: आईसीएआई

आंतरिक वित्तीय नियंत्रण को अनुपालन नहीं, कारोबारी आवश्यकता मानें: आईसीएआई
Modified Date: June 27, 2026 / 03:30 pm IST
Published Date: June 27, 2026 3:30 pm IST

मुंबई, 27 जून (भाषा) देश के चार्टर्ड अकाउंटेंट का शीर्ष निकाय भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी ने कहा है कि कॉरपोरेट प्रशासन और जोखिम प्रबंधन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच मजबूत आंतरिक वित्तीय नियंत्रण को केवल अनुपालन की अनिवार्यता नहीं, बल्कि कारोबार की आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंतरिक नियंत्रण किसी भी कारोबार की बुनियाद होता है। इससे संस्थानों को जोखिमों की पहचान करने, वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

प्रसन्न कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘आंतरिक वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था केवल अनुपालन का विषय नहीं है, बल्कि यह स्वयं कारोबारी हित से जुड़ा मामला है। प्रत्येक उद्यमी के पास प्रभावी आंतरिक वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था होनी चाहिए।’’

उनकी यह टिप्पणी वित्तीय क्षेत्र में हाल में सामने आए कॉरपोरेट प्रशासन संबंधी मामलों की पृष्ठभूमि में आई है।

उन्होंने कहा, ‘‘कॉरपोरेट प्रशासन की व्यवस्था मौजूद रहती है, लेकिन उसमें हमेशा सुधार की गुंजाइश होती है। यदि कॉरपोरेट प्रशासन विफल होता है तो आंतरिक वित्तीय नियंत्रण प्रणाली भी विफल हो सकती है और अंततः संस्थान मुश्किलों में फंस सकता है।’’

वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाने में लेखा परीक्षकों की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि लेखा परीक्षक उपलब्ध सूचनाओं और लेखा परीक्षा के निर्धारित दायरे के आधार पर यह राय देते हैं कि वित्तीय विवरण कंपनी की वास्तविक और निष्पक्ष वित्तीय स्थिति को दर्शाते हैं या नहीं।

उन्होंने कहा, ‘‘वित्तीय विवरणों से जुड़े मुद्दे और धोखाधड़ी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ये प्रत्येक कंपनी या संस्थान से जुड़े अलग-अलग मामले होते हैं। कहीं न कहीं प्रणालीगत विफलता भी इसकी वजह हो सकती है।’’

आईसीएआई अध्यक्ष ने संवैधानिक लेखा परीक्षा और आंतरिक लेखा परीक्षा के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि संवैधानिक लेखा परीक्षा एक समान ढांचे के तहत होती है, जबकि आंतरिक लेखा परीक्षा का दायरा कंपनी और लेखा परीक्षक के बीच तय व्यवस्था पर निर्भर करता है।

उन्होंने कहा कि आंतरिक लेखा परीक्षा का उद्देश्य वर्ष के दौरान सुधार की संभावनाओं, संभावित वित्तीय गड़बड़ी और जोखिमों की पहचान करना है, ताकि प्रबंधन समय रहते सुधारात्मक कदम उठा सके।

एक अलग घटनाक्रम में उन्होंने कहा कि आईसीएआई ने मंदिर प्रशासन के अनुरोध पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के लिए नया लेखांकन ढांचा और लेखांकन पुस्तिका तैयार करने का काम शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि आईसीएआई के शोध प्रतिष्ठान की मंजूरी के बाद इस परियोजना को निःशुल्क आधार पर पूरा किया जाएगा।

भाषा योगेश रमण

रमण


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